पचास पार सखियों के लिए

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अंटी

उम्र पचास पार है लेकिन
शक्ल हमारी पच्चीस के जैसी।
मुझको अंटी कहने वालो,
तुम्हारी ऐसी की तैसी।।।

बेटे के कॉलेज गयी तो,
टीचर देख मुझे मुस्कुराई।।।
बोली क्या मेनटेनड हो MISS ?
मम्मी हो,पर लगते हो SIS।।

नीयत मेरी साफ़ है सखियो,,
नही हरकतें ऐसी वैसी।
मुझको अंंटी कहने वालों,
तुम्हारी ऐसी की तैसी।।।।

कितनी जंग लड़ी और जीती,
इन गुज़रे सालों में।।।
दो-एक झुर्रियाँ गालों में हैं,
और थोडी सफ़ेदी बालों में ।।।।

इरादे मगर मज़बूत हैं अब भी,
उमंग भी सॉलिड पहले जैसी।
मुझको अंटी कहने वालों,
तुम्हारी ऐसी की तैसी।।।।

जीने का जज़्बा क़ायम हो तो,
उम्र की गिनती फिर फ़िज़ूल है।
अपने शौक़ को ज़िंदा रखो,
जीने का बस यही उसूल है।।।

ज़िंदादिली का नाम है जीवन,
परिस्थितियाँ हों चाहे जैसी।।।
मुझको अंटी कहने वालों,
तुम्हारी ऐसी की तैसी.

मेरे सभी 50+ वर्षीय सखियों को समर्पित

महिमा

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