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अटूट निष्ठा: जब शोक की लहरों पर भारी पड़ा संगठन सर्वोपरि का संकल्प – संजय सरावगी

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Spread the loveदरभंगा। राजनीति में पद और प्रतिष्ठा तो बहुत लोग पाते हैं, लेकिन संजय सरावगी जैसे व्यक्तित्व बिरले ही होते हैं जो अपने आचरण से ‘सेवा’ की नई परिभाषा लिख देते हैं। 22 फरवरी 2026 की वह घड़ी, जब पूरा दरभंगा उनकी पूज्य माता जी के निधन के शोक में डूबा था, सरावगी जी…

जीवनी: फणीश्वरनाथ रेणु : अशोक चौधरी

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Spread the love फणीश्वर नाथ रेणु जीवनी फणीश्‍वर नाथ रेणु का जन्म 4 मार्च 1921 को औराडी हिंगन्ना, जिला पूर्णियां, बिहार में हुआ। आप आजीवन शोषण और दमन के विरूद्ध संधर्षरत रहे। इसी प्रसंग में सोशलिस्ट पार्टी से जा जुड़े व राजनीति में सक्रिय भागीदारी की। 1942 के भारत-छोड़ो आंन्दोलन में सक्रिय भाग लिया। 1950…

क्या है समान नागरिक कानून, क्यों लागू होना चाहिए: अशोक चौधरी

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Spread the love  समान नागरिक संहिता संबंधी विवाद और उसका आलोचनात्मक परीक्षण भाजपा ने अपने चुनाव संकल्प पत्र में घोषणा किया था की हमारा दल चुनाव जीत कर सत्ता में आने के बाद समाज और राष्ट्र हित के विरुद्ध जो भी नियम कानून है उसमे संशोधन करेगा ताकि पूरा देश एक झंडा के अंतर्गत एक…

फर्जी किसान आंदोलन- असली खेल तो अब शुरू हुआ है

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Spread the love*फर्जी किसान आंदोलन- असली खेल तो अब शुरू हुआ है* सबका काम करने का अपना तरीक़ा होता है. लोकतंत्र है तो विपक्ष रहेगा, विरोध रहेगा. ध्यान दीजिए मोदी सरकार ने चिरोधियों को किस हालत में पहुँचा दिया – सीधा अटैक कभी नहीं किया, मोदी जी विरोधियों को हलाल करते हैं, धीमे धीमे. वो…

मोदी के लाठी में आवाज नहीं होता

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Spread the love मोदी के लाठी में आवाज नहीं होता।अजीत अंजुम, पुण्य प्रसून बाजपेयी, बरखा दत्त, अभिसार शर्मा, आशुतोष कुमार, प्रभु चावला ये सब बड़े बड़े नाम जो कल तक भारतीय मीडिया की दिशा तय करते थे और बॉस होते थे, आज सब यूट्युबर हैं। शाहरुख और आमिर खान जैसे लोगों के पीछे आम आदमी…

शर्मिला टैगोर से शादी के लिए मंसूर अली खान पटौदी ने इस अभिनेत्री से किया ….

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Spread the love*शर्मिला टैगोर* से शादी के लिए *मंसूर अली खान पटौदी* ने इस एक्ट्रेस से किया था ब्रेकअप, ऐसे हुई थी पहली मुलाकात60 और 70 के दशकी सबसे पॉपुलर एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर से शादी करने के लिए क्रिकेटर मंसूर अली खान पटौदी ने सिमि ग्रेवाल से ब्रेकअप कर लिया था. उन्होंने सिमी को अपनी…

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हास-परिहास: निबंध लेखन की कला

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Spread the loveनिबंध लेखन:जब हम स्कूल में पढ़ते थे तो एक चीज से बहुत परेशान रहते थे, और वो थी हिंदी निबंध। हिंदी के प्रश्न पत्र में दुनिया के किसी भी विषय पर निबंध आ जाता था। आखिर बच्चा कितने निबंध याद करे? तब किसी अनुभवी सीनियर ने ये फॉर्मूला बताया कि, हर विषय पर…

बजट 2021-22: होगा आत्मनिर्भर भारत पर फोकस- अशोक चौधरी

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Spread the love   1 फरवरी 2021 को पेश होने वाले बजट में सरकार का मुख्य फोकस अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए रहेगा. सरकार ने पिछले दिनों आत्मनिर्भर भारत का एलान किया था. अब उसे सही से अमलीजामा पहनाने के लिए बजट में बड़ी घोषणाएं हो सकती हैं. सरकार आत्मनिर्भर भारत पैकेज के…

चर्चा है कोरोना वैक्सीन की: गर्व है कि हम भारत में पैदा हुए हैं.

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Spread the love यह विषय विशुद्ध रूप से भारत का है, किसी राजनीतिक दल का नहीं. बात है कोरोना वैक्सीन की. देश विरोधी तत्व वैक्सीन पर घृणित राजनीति कर रहे हैं. यह अपेक्षित था कि अपनी वैक्सीन आएगी तो विदेशी शक्तियों के भाडे पर पल रहे समूह अपना आपा खो बैठेंगे. बहुराष्ट्रीय कंपनी की वैक्सीन…

क्या है RSS: पिताजी की डायरी से

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Spread the love राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तृतीय सरसंघचालक श्री बालासाहब देवरस ने अपने स्वास्थ्य कारणों से सरसंघचालक पद का त्याग कर, सरसंघचालक का दायित्व प्रो. रज्जू भैया को सौंप दिया था. इसी बीच उस समय के कम्युनिष्ट पत्रकार बिल्टिज साप्ताहिक के संम्पादक “रूसी करंजिया” “रज्जू भैया” से मिलने नागपुर पहुंचे. कुछ समय उनकी रज्जू भैया…

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पचास पार सखियों के लिए

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Spread the love  अंटी उम्र पचास पार है लेकिनशक्ल हमारी पच्चीस के जैसी।मुझको अंटी कहने वालो,तुम्हारी ऐसी की तैसी।।। बेटे के कॉलेज गयी तो,टीचर देख मुझे मुस्कुराई।।।बोली क्या मेनटेनड हो MISS ?मम्मी हो,पर लगते हो SIS।। नीयत मेरी साफ़ है सखियो,,नही हरकतें ऐसी वैसी।मुझको अंंटी कहने वालों,तुम्हारी ऐसी की तैसी।।।। कितनी जंग लड़ी और जीती,इन…

जीवनी: स्वामी विवेकानंद-अशोक चौधरी

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Spread the love स्वामी विवेकानन्द वेदान्त के विख्यात और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु थे। उनका वास्तविक नाम नरेन्द्र नाथ दत्त था। उनका जन्म : १२ जनवरी १८६३ उन्होंने अमेरिका स्थित शिकागो में सन् १८९३ में आयोजित विश्व धर्म महासभा में भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया था। भारत का वेदान्त अमेरिका और यूरोप…

स्ट्रीट वेंडर्स: असुविधा और अभावों के बीच असुरक्षित भविष्य की दुनिया- अशोक चौधरी

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Spread the love   किसी शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, स्थानीय बाजार या सड़क किनारे खड़े होकर या फेरी लगाकर दिन-प्रतिदिन के कार्यों में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं को बेचकर आजीविका चलाने वाले पथ विक्रेताओं (स्ट्रीट वेंडर्स) से हम सभी का सामना अक्सर होता है। ये वेंडर्स स्वरोजगार के माध्यम से न केवल अपनी रोजी-रोटी कमा रहे हैं…

कम्युनिस्ट और विपक्ष नहीं चाहता हैं भारत आत्मनिर्भर बने: अशोक चौधरी

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Spread the loveकमाल की बात है कि जब तक भारत की एफएमसीजी पर हिंदुस्तान लीवर लिमिटेड और प्रॉक्टर एंड गैंबल का एक छत्र कब्जा था तब आप लोगों को चिंता नहीं हुई…वह तो अच्छा था कि करसन भाई पटेल ने साइकिल चला चला कर इनके एकछत्र राज को खत्म कर दिया… जब टूथपेस्ट बाजार पर…

कम्युनिस्ट कभी शर्मिंदा नहीं होता: अशोक चौधरी

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Spread the loveकम्युनिस्ट कभी शर्मिंदा नहीं होता… चाहे उसके मुंह पर कितनी ही कालिख मल दी जाए भारत के कम्युनिस्टों को दिन में 24 घंटे… सोते-जागते… सांस लेते.. सिर्फ यही ख्याल रहता है कि भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं है । इनको हर 10 मिनट में दिमागी दौरे पड़ते हैं कि मोदी सरकार ने…

हिन्दू क्यों गुलाम हुआ: अशोक चौधरी

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Spread the loveलघुकथा-शाहजहाँ ने बताया था… हिंदू क्यों गुलाम हुआ ? मुग़ल बादशाह शाहजहाँ लाल किले में तख्त-ए-ताऊस पर बैठा हुआ था। तख्त-ए-ताऊस काफ़ी ऊँचा था । उसके एक तरफ़ थोड़ा नीचे अग़ल-बग़ल दो और छोटे-छोटे तख्त लगे हुए थे । एक तख्त पर मुगल वज़ीर दिलदार खां बैठा हुआ था और दूसरे तख्त पर…

किसान आंदोलन की तरह था बागपत आंदोलन जहाँ नही बन सका नोएडा: अशोक चौधरी

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Spread the love चौधरी साहब वेस्ट UP के बागपत जिले के निवासी थे ।।वो किसानों से ज्यादा जाट बिरादरी के नेता थे ।।बात तबकी है जब इंदिरा गांधी PM थीं और UP में भी कांग्रेस की सरकार थी ।।उस समय बढ़ती हुई दिल्ली को विस्तार देने के लिए एक नई नगरी बसाने की योजना पे…

बंगाल की राह पर पंजाब को ले जाने का षड्यंत्र

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Spread the love आज पंजाब में जो कुछ हो रहा है जैसे कृषि सुधारों को लेकर आंदोलन ,जिओ के टावर तोड़ने ,अंबानी अडानी को पंजाब में न घुसने देने की धमकियां दी जा रही है। कभी बंगाल में भी इसी तरह की घटनाएं घटी थी।और बंगाल अपनी समृद्धि और सांस्कृतिक पहचान गवां बैठा था। वहीं…

क्या कहता है स्वामीनाथन रिपोर्ट तथा कृषि संशोधन कानून: अशोक चौधरी

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Spread the love   किसानों की भलाई की बात सामने आते ही सबसे पहले स्वामीनाथन रिपोर्ट सभी के जहन में आती है. किसान संगठन हर बार स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करने की मांग करते रहे हैं. यहां समझें आखिर क्या थी वह स्वामीनाथन रिपोर्ट…कौन है स्वामीनाथन: प्रोफेसर एमएस स्वामीनाथन को देश में हरित क्रांति का जनक…

वोकल फॉर लोकल: आत्मनिर्भर भारत के लिए आवश्यक कदम- अशोक चौधरी

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Spread the love   आत्मनिर्भर भारत की दिशा में आगे बढ़ने के लिए स्थानीयता पर जोर देना होगा। यानी लोकल को वोकल होना पड़ेगा। आत्मनिर्भरता का अभियान पांच स्तंभों पर टिका होगा: अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचा, प्रणाली, जीवंत लोकतंत्र और मांग। आत्मनिर्भरता का मतलब दुनिया से कनेक्शन तोड़ लेना नहीं है। बल्कि ऐसे उत्पाद जिसका टेक्नोलॉजी…

क्यों बौखलाहट है नये कृषि कानून से – अशोक चौधरी

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Spread the loveनए कृषि रिफॉर्म की जड़ क्या है और राजनेता इससे क्यों चिंतित हैं ? इसे सही ढंग से समझने के लिए इस विश्लेषण को पढ़ें। नई प्रणाली में, कृषिउपज के व्यापारियों को केंद्रीय_प्राधिकरण के साथ अपने PAN के साथ उन्हें पंजीकृत करना होगा। प्रथम स्तर का लेनदेन जो (किसान और व्यापारी के बीच)…

कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग से होगा आधुनिक खेती तथा किसानो को होगा लाभ: अशोक चौधरी

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Spread the love    भारत में खेती पूरी तरह से कुदरत के भरोसे है. कभी सूखा तो कभी ज्यादा बारिश, खेत में खड़ी फसल को चौपट कर देते हैं. हमारे देश में ज्यादातर छोटे किसान हैं. ये किसान अपने खेतों में कुछ ज्यादा प्रयोग भी नहीं कर पाते. आलम ये हो गया है कि लोग…

जीवनी: पं मदन मोहन मालवीय

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Spread the love   पंडित मदनमोहन मालवीय का जन्म 25 दिसम्बर 1861 को इलाहाबाद में हुआ. इनके पिता बृजनाथ मालवीय ने इनकी प्रारम्भिक शिक्षा की व्यवस्था ‘धर्म ज्ञानोपदेश पाठशाला’ में करायी. इसके बाद इन्हें ‘विद्धाधर्म प्रवाधिर्नी’ में प्रवेश दिलाया गया. पंडित मदनमोहन मालवीय अत्यंत मेधावी छात्र थे.अतः इन्हें शिक्षको का भरपूर स्नेह मिला.इसी विद्यालय के…

क्यों मचा है नए कृषि कानून पर घमासान

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Spread the loveप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी ने में 2016 में बरेली में कहा की 2022 तक देश के किसानो का दोगुना किया जायेगा ऐसा बोलते समय प्रधानमंत्री जी के मन में कोई योजना तो अवश्य रही होगी। वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के अपने वादे को अमल में लाने के लिए केंद्र सरकार…

जब महिला हो सामने तब कैसे चलाएं गाड़ी

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Spread the love   गाड़ी चलाते समय क्या सावधानी बरतें गाड़ी चलाते हुए अगर कोई बच्चा सामने आ जाए तो पहले कोशिश करे कि गाड़ी को रोक लें मगर यह मुमकिन न हो तो फिर बच्चे के पीछे से निकालें क्यों कि साधारणतया बच्चा आगे की तरफ दोड़ता है. इसी प्रकार कोई बुजुर्ग गाड़ी के…

सदर से सदन तक: तारकिशोर प्रसाद

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Spread the love सहर्षा के कोपड़िया गांव से आकर कटिहार सदर के मिरचाईबाड़ी में बसे एक साधारण व्यावसायिक किसान परिवार श्री गंगा प्रसाद भगत के घर वर्ष 1956 में एक यशस्वी बालक का जन्म हुआ जिसका नाम तारकिशोर प्रसाद है. तारकिशोर प्रसाद बचपन से ही तेज तर्रार और मेधावी रहे हैं. बाल्यकाल में ही तारकिशोर…

नामस्ते भारत की भाविष्यवाणी सत्य: तारकिशोर बने डिप्टी सीएम-अशोक चौधरी

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Spread the love  नमस्ते भारत में 12 नवम्बर 2020 को “बिहार कैबिनेट में कौन हो सकता है सीमांचल से नया चेहरा ?” शीर्षक लेख प्रकाशित हुआ था, लेख में उल्लेख किया गया था तारकिशोर प्रसाद को बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम श्री सुशील मोदी का दाहिना हाथ माना जाता है। जिसमे हमने बताया था तारकिशोर…

आइए जानते हैं रेणु देवी उप मुख्यमंत्री के बारे में

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Spread the love सन्दर्भ के लिए : पुराना फाइल वीडियो संलग्न : रेणु देवीजी का जीवन काफी संघर्षपूर्ण रहा है. इनकी शादी वर्ष 1973 में हुई थी परन्तु इनका वैवाहिक जीवन बहुत लम्बा नहीं चल सका. वर्ष 1979 में गंभीर बीमारी के कारण हो गया. रेणुजी को दो संतान एक पुत्र तथा एक पुत्री है.…

कौन है डिप्टी -सीएम के जीत के सूत्रधार

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Spread the loveबिहार में फिर से एनडीए की सरकार बनाने के लिए, बिहार में मामलों की स्थिति को संभालने के लिए भाजपा 2 डिप्टी सीएम फार्मूला लेकर आई। यह उत्तर प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों में भाजपा की रणनीति रही है। आइए नजर डालते हैं कि भारत के सबसे राजनीतिक रूप से सक्रिय राज्य के…

तारकिशोर हो सकते है बिहार के उप-मुख्यमंत्री

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Spread the loveबिहार विधानसभा की सियासी तस्वीर साफ हो चुकी है. बिहार में एक बार फिर नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए सरकार बनाने जा रही है. वहीं, महागठबंधन को विपक्ष में बैठना होगा. बिहार में राजद सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. महागठबंधन को सबसे बड़ा नुकसान सीमांचल इलाके में हुआ है. सीमांचल में…

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आओ जियें जिन्दगी बन्दगी के लिए

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Spread the loveपता नहीं किस बात पर इतराता है आदमीकब समझेगा अर्थ ढाई आखर का आदमीभूल बैठा है आज वो निज कर्तव्य को खून क्यों मानव का बहाता है आदमी क्यों शब्दों के बाण सेऔरों का दिल दुखाता है आदमी“जियो और जीने दो “कब समझेगा ये आदमीखुद से क्या भगवान से है बेखबरआज आस्था के…

बिहार कैबिनेट में कौन हो सकता है सीमांचल से नया चेहरा ?

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Spread the love बिहार विधानसभा की सियासी तस्वीर साफ हो चुकी है. बिहार में एक बार फिर नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए सरकार बनाने जा रही है. वहीं, महागठबंधन को विपक्ष में बैठना होगा. बिहार में राजद सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. महागठबंधन को सबसे बड़ा नुकसान सीमांचल इलाके में हुआ है. सीमांचल…

बिहार में 20 साल बाद भाजपा बिग ब्रदर, नीतीश का रुतबा कमजोर

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Spread the loveबिहार में तीसरी बार NDA सरकार बनाती दिख रही है। पर इस बार नीतीश कुमार का कद छोटा होता नजर आ रहा है। भाजपा को राज्य में 2015 से भी ज्यादा सीटें मिलती दिख रही हैं। अभी के मुताबिक, भाजपा 70 से 80 सीटों के बीच रह सकती है। 2015 में उसे 53…

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आत्मावलोकन

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Spread the love      मैंने ईश्वर से शक्ति माँगी थी, ताकि मैं कुछ प्राप्त कर सकूँ उसने मुझे कमजोर बनाया, ताकि मैं दूसरों की सेवा कर सकूँ मैंने सेहत माँगी थी, ताकि मैं बड़े काम कर सकूँ, मुझे दुर्बलता मिली, ताकि मैं अच्छे काम कर सकूँ. मैंने धन दौलत माँगी थी, ताकि मैं खुश…

मैं अपने गाँव जाना चाहती हूँ

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Spread the love मैं अपने गाँव जाना चाहती हूँ मैं अपने गाँव जाना चाहती हूँ। जाड़े की नरम धूप और वे छत का सजीदा कोना, नरम-नरम किस्से मूंगफली के दाने और गुदगुदा बिछौना मैं अपने गाँव जाना चाहती हूँ। घूप के साथ खिसकती खटिया, किस्सों की चादर व सपनों की तकिया मैं अपने गाँव जाना…

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जिंदगी भर प्रयास ही प्रयास

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Spread the love प्रयास अँधेरे कमरे में बिछावन पर लेटे हुए सिरहाने पर सर रख सोनेका प्रयासदिन भर हुई मुलाकातों मेंछुपे प्रश्नो को ढूंढने का प्रयासहर परीक्षा में टॉप करने का प्रयासहार कर सब कुछ जीता हुआ दिखाने का प्रयासबड़ा घर बड़ी गाड़ी का प्रयासबड़ा बैंक बैलेंस बनाने का प्रयासजमीन छोड़ आसमान में उड़ जाने…

स्त्री-पुरुष का पारस्परिक वार्तालाप कैसे हो

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Spread the love बातचीत कैसे करें ? स्त्री-पुरुष का पारस्परिक वार्तालाप कैसे हो, किस विषय पर और कब हो, उन दोनों को अपने सम्बन्धियों से किस ढंग से वार्तालाप करना चाहिए. पड़ोसी से अथवा किसी अपरिचित, से किस प्रकार बातें करनी चाहिए यह विषय बहुत गम्भीर है। वार्तालाप की छोटी-सी भूल का परिणाम बड़ा भयंकर…

स्त्री तरणी है तथा पुरुष पतवार

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Spread the love अनुभव आधारित सुखमय गृहस्थ जीवन के सूत्र संसार में बिना स्त्री के मनुष्य का जीवन नीरस और बिना पुरुष के स्त्री का संसार व्यर्थ है। बिना स्त्री-पुरुष के परस्पर सहयोग के इस संसार का चलना भी असम्भव है, इसे भी कोई अस्वीकार न करेगा। यदि स्त्री तरणी है तो पुरुष पतवार है।…

क्या नॉमिनी संपत्ति का असली मालिक होता है ?

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Spread the love   मृतक की संपत्ति का असली मालिक नॉमिनी ही होता है ? क्या है इसके प्रावधान? क्या नॉमिनी संपत्ति का वारिस भी होता है यह एक ऐसा सवाल है जिसके बारें तकनीकी जानकारी कम ही लोगों है. आज हम आपको बताएंगे कि नॉमिनी कैसे संपत्ति के वारिस से अलग होता है. बहुत…

चमत्कार: मुंशी प्रेमचन्द की कहानी

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Spread the love लालच आदमी को क्या से क्या बना देता है मुंशी प्रेमचन्द की कहानी “चमत्कार “ बी.ए. पास करने के बाद चन्द्रप्रकाश को एक टयूशन करने के सिवा और कुछ न सूझा। उसकी माता पहले ही मर चुकी थी, इसी साल पिता का भी देहान्त हो गया और प्रकाश जीवन के जो मधुर…

अमृत की वर्षा हुई भीगे अंग प्रत्यंग

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Spread the love अमृत की वर्षा हुईभीगे अंग प्रत्यंगमाधव जब लिपटा लिएमोहे लगा कर अंग । राजीव जायसवाल, CA. DELHI वह पल , वह वेला जब हम साक्षी भाव से भर गए , जिस पल हम ने परम सत्य से , परम प्रकाश से साक्षात्कारः कर लिया , जिस पल हम ने यह जान लिया…

जानिए किस बीमारी में कौन सा आसन करे

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Spread the love करें योग से रहे निरोग : जानिए किस बीमारी में कौन सा आसन करे इस पोस्ट को सुरक्षित रखें आप एवं आपके परिवार व सम्पर्कित के लिए सदैव उपयोगी जैसा की हम सबको विदित है की विभिन्न बीमारियों में योगासन रोगों को ठीक करने या रोगों से होने वाले कष्टों से आराम…

विध्वंस: मुंशी प्रेम चंद की कहानी

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Spread the love विध्वंस जिला बनारस में बीरा नाम का एक गाँव है। वहाँ एक विधवा वृद्धा, संतानहीन, गोंड़िन रहती थी, जिसका भुनगी नाम था। उसके पास एक धुर भी जमीन न थी और न रहने का घर ही था। उसके जीवन का सहारा केवल एक भाड़ था। गाँव के लोग प्रायः एक बेला चबैना…

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संस्मरण: रमेश उपाध्याय भाग ६

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Spread the love   कोशी क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक:भोगा यथार्थ 6 रमेश उपाध्याय फरवरी 2001 में किशनगंज पहुँचा । छोटा शान्त व कमशाखाओं वाले जिला से मै पूरी तरह परिचित था । सभी सहकर्मियों से पहले से ही वाकिफ़ था । एक तरफ बंगालतो दूसरी तरफ बंगलादेश की सीमा से जुड़ा हुआ यहजिला बिहार के निर्धनतम…

जीवनी:शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय,फिल्म देवदास के साथ

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Spread the love शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय जीवनी         शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय बांग्ला के सुप्रसिद्ध उपन्यासकार थे। उनका जन्म हुगली जिले के देवानंदपुर में हुआ। वे अपने माता-पिता की नौ संतानों में से एक थे। अठारह साल की अवस्था में उन्होंने इंट्रेंस पास किया। इन्हीं दिनों उन्होंने “बासा” (घर) नाम से एक उपन्यास लिख डाला,…

मुंशी प्रेमचंद की कहानी: पंच परमेश्वर

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Spread the love पंच परमेश्वर   जुम्मन शेख अलगू चौधरी में गाढ़ी मित्रता थी। साझे में खेती होती थी। कुछ लेन-देन में भी साझा था। एक को दूसरे पर अटल विश्वास था। जुम्मन जब हज करने गये थे, तब अपना घर अलगू को सौंप गये थे, और अलगू जब कभी बाहर जाते, तो जुम्मन पर…

क्या है: कृत्रिम बुद्धिमत्ता आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई)

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Spread the loveकृत्रिम बुद्धिमत्ता क्या है Artificial Intelligence (AI) आज अगर इंसानो ने टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में इतना विकास किया है, तो उसमें हमारे ह्यूमन ब्रेन का सबसे बड़ा हाथ है। अपनी इस बुद्धि के बल पर इंसानो ने कई अविष्कार किये है और यह बताने वाली बात नही कि हर अविष्कार ने मनुष्यो की…

जीवनी: जोगेंद्र नाथ मंडल

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Spread the love सुशील कुमार जायसवाल जोगेंद्र नाथ मंडल का जन्म बंगाल के बरीसल जिले के मइसकड़ी में हुआ था । वो एक पिछड़ी जाति से आते थे, इनकी माता का नाम संध्या और पिताजी का नाम रामदयाल मंडल था । जोगेन्द्रनाथ मंडल 6 भाई बहन थे जिनमे ये सबसे छोटे थे । जोगेंद्र ने…

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मानव तु साथी बन, पथ में अनुरागी बन

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Spread the loveमल्लिका रॉय (घोष),लखनऊ मानव तु साथी बन, पथ में अनुरागी बन ।असमंजस उलझन में, आकर सहगामी बन।जीवन की रातों में, हर दिन के ख़्वाबों में अविरल जल धारा बन।शशिधर सी छाया बन।दुःख की बरसातो में, खुशियों की राहों में मन की एक आशा बन।हर दिल की भाषा बन।संकोची राहों में, दिल की अरमानों…

रामविलास पासवान का देहांत, राजनीति के एक युग का अवसान

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Spread the love  केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान का 8 अक्टूबर निधन हो गया है . 74 साल के पासवान ने दिल्ली के एक अस्पताल में आखिरी सांसें लीं. पिछले दिनों उनके दिल की सर्जरी हुई थी. उनकी राजनीतिक यात्रा बेहद लंबी रही.     खास बातें केन्द्रीय मंत्री के निधन से शोक में राजनीति जानिए रामविलास…

जीवनी: जयप्रकाश नारायण

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Spread the loveएक झलक जयप्रकाश नारायण के जीवन काल पर भारतीय स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक और लोकप्रिय प्रसिद्ध समाजवादी राजनेता के रूप में आने जाते थे जयप्रकाश नारायण जी  विचार के पक्के और बुद्धि के सुलझे हुए व्यक्तित्व के स्वामी थे. अन्धकार में डूबे देश को प्रकाश में लाने  का कार्य किया, देश के नवनिर्माण के कार्य  में…

दो बैलों की कथा : मुंशी प्रेमचंद

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Spread the loveदो बैलों की कथा जानवरों में गधा सबसे ज्यादा बुद्धिमान समझा जाता है। हम जब किसी आदमी को पहले दर्जे का बेवकूफ कहना चाहते हैं, तो उसे गधा कहते हैं। गधा सचमुच बेवकूफ है या उसके सीधेपन, उसकी निरापद सहिष्णुता ने उसे यह पदवी दे दी है, इसका निश्चय नहीं किया जा सकता।…

जीवनी: आचार्य चाणक्य {कौटिल्य}

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Spread the love   आचार्य चाणक्य को ही कौटिल्य, विष्णु गुप्त और वात्सायन कहते हैं। उनका जीवन बहुत ही कठिन और रहस्यों से भरा हुआ है। आओ जानते हैं उनके जीवन की संक्षिप्त कहानी।मगध के सीमावर्ती नगर में एक साधारण ब्राह्मण आचार्य चणक रहते थे। चणक मगथ के राजा से असंतुष्ट थे। चणक किसी भी…

जानिए RIP रिप का अर्थ

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Spread the loveRIP का मतलब क्या हैये “रिप-रिप-रिप-रिप” क्या है ? आजकल देखने में आया है कि किसी मृतात्मा के प्रति RIPलिखने का “फैशन” चल पड़ा है. ऐसा इसलिए हुआ है, क्योंकि कान्वेंटी दुष्प्रचार तथा विदेशियों की नकल के कारण हमारे युवाओं को धर्म की मूल अवधारणाएँ, या तो पता ही नहीं हैं, अथवा विकृत…

जीवनी: लाल बहादुर शास्त्री

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Spread the love श्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी से सात मील दूर एक छोटे से रेलवे टाउन, मुगलसराय में हुआ था। उनके पिता एक स्कूल शिक्षक थे। जब लाल बहादुर शास्त्री केवल डेढ़ वर्ष के थे तभी उनके पिता का देहांत हो गया था। उनकी माँ…

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अब आए है कपड़े के गमले जो बचाए पानी और दिखे सुंदर

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Spread the loveअब आए है कपड़े के गमले जो बचाए पानी और दिखे सुंदर अपनाये आप भी ये तकनीक_* कल्पना कीजिए कि आपके घर के ड्राइंग रूम, दफ्तर, फैक्टरी, बालकानी और छत पर गमलों में पौधे हरे-भरे रहे और आपको इसके लिए न तो ज्यादा पानी खर्च करना पड़े और और न ही अपनी खून…

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संस्मरण: प्रशान्त कुमार घोष जी

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बैंक में वह दस दिन नॉकरी के तलाश में तो मैं मेट्रिक पास होने के पहले से ही सोचना शुरू कर दिया था।इसका एक मात्र कारण था मेरे पिताजी का रिटायरमेंट।पिताजी रेलवे में मधेपुरा स्टेशन के स्टेशन मास्टर थे।1972 साल में वे सेवा निबृत हो गए।उस समय मैं 10th में पढ़ता था और अगले साल 1973 में बोर्ड परीक्षा देना था।हमलोग पांच बहन और दो भाई हैं।पिताजी के सेवा काल में एक भी बहन का शादी तक नहीं हुआ था।सब कोई पढाई या प्राइवेट ट्यूशन करते थे।ऐसी हाल में मुझे हमेशा यही बात सता रहा था कि कैसे परिवार चलेगा? इसलिए मुझे पढाई करने में मन नहीं लगता था।उस समय पिताजी को पेंशन बहुत ही कम 340 रुपैया महीना मिलता था। तीन बहन हमसे बड़ी और दो बहन एक भाई हमसे छोटा था।अच्छे रिजल्ट के लिए ट्यूशन पढ़ने का भी क्षमता नहीं था।हमलोग खुद या बड़ो का मदद लेकर ही पढाई करते थे।1973 में मैट्रिक पास करने के बाद लोकल कॉलेज T P College, Madhepura में Isc में दाखिला लिया और पढ़ाई के साथ साथ प्राइवेट ट्यूशन पढ़ाना भी शुरू किया।1975 में इंटर पास कर ग्रेजुएशन के लिए पुनः T P College में ही दाखिला लिया और सुबह शाम ट्यूशन भी पढ़ाया करता था।जैसे ही मेरा उम्र18 वर्ष हुआ उसी दौड़ान 1977 में कोशी क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक का लिपिक सह खजांची पद हेतु वेकेंसी निकला।मै प्रथम बार नॉकरी के लिए आवेदन दिया और लिखित परीक्षा में भी भाग लिया था।लेकिन मैं उसमे सफल नहीं हो सका था।इसके बाद तो नॉकरी के तलाश में जितने भी मेरे योग्यता के लायक वेकेंसी निकलता था उसमें आवेदन भेजता था,परीक्षा भी देता था लेकिन दुर्भाग्यवश सफल नहीं हो पाता था।उसी दौड़ान हमसे बड़ी बहन को बंगाल में दुर्गापुर स्टील प्लांट के ऑफिस में हिंदी विभाग के प्रभारी के रूप में नॉकरी मिला और तब आर्थिक रूप से हमलोगों को थोड़ा मदद मिला। लेकिन दो बहन का शादी देते देते पिताजी का सब जमा पूंजी भी खत्म हो गया।खेती या दूसरा व्यवसाय नहीं रहने के कारण अब तो सिर्फ पिताजी का पेंशन,मेरे ट्यूशन और एक बड़ी बहन के नॉकरी पर ही परिवार चलने लगा।उस समय ट्यूशन से कम ही पैसा मिलता था।सुबह शाम ट्यूशन से मात्र 350 रुपैया ही प्राप्त होता था।इसी आमदनी पर सभी भाई बहन का पढ़ाई चल रहा था।दुर्गापुर स्टील प्लांट के हिंदी विभाग के स्टेनो टाइपिस्ट के लिए भी interview दिया था, selection list के पैनल के सीरियल एक में मेरा नाम भी था,लेकिन राजनितिक कारणों से पैनल को रद्द कर दिया गया।जिससे मेरा मन बहुत ही अशांत रहने लगा।डिप्रेशन के कगार पर आ गया था।ऐसी परिस्थिति में ही 1975-77 के बैच में मै ग्रेजुएशन किया ,लेकिन सेशन लेट रहने के कारण 1979 के अंत तक रिजल्ट दिया।ग्रेजुएशन के बाद तो नॉकरी के लिए और भी दौर धुप करने लगा।1980 के मई या जून में पुनः हमारे KKGB का लिपिक सह खजांची पद के लिए वेकेंसी निकला।जिसमे मै ने आवेदन दिया,लिखित और interview देकर सफलता प्राप्त किया।दुर्गापूजा के अष्टमी के दिन मुझे 20.11.1980 को प्रधान कार्यालय ,पूर्णिया में योगदान करने हेतु call letter मिला ।शुभ दिन में शुभ खबर पाकर परिवार के सभी सदस्य बहुत खुश थे।सब भगवती माँ दुर्गा की कृपा का ही फल था।20.11.1980 का वह दिन हमारे जीवन का नया मोड़ था।सुबह जल्द उठकर तैयार होकर बस से पूर्णिया पहुँचकर NH 31 के बगल में स्थित फोर्ड कंपनी के बगल में कोशी क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक के प्रधान कार्यालय पहुँच गया।फिर अपना सभी Original certificate दिखाकर अपना योगदान दिया।उस समय हमारे अध्यक्ष महोदय श्री आर0 प्रसाद थे।कोशी ग्रामीण बैंक में योगदान देने के बाद फिर मैं अन्य किसी जगह नॉकरी के लिए न तो आवेदन दिया और न ही कोशिश की।जीवन में पहली वार इसी बैंक में आवेदन दिया था और अंत में इसी बैंक ने मुझे रोजगार देकर मेरे परिवार को ही नहीं बचाया ,बल्कि हमलोगों को आगे बढ़ने का रास्ता भी खोल दिया।इसके लिए मैं KKGB का सदा आभारी हूँ। प्रधान कार्यालय 20.11.1980 को योगदान करने के वाद मुझे मधेपुरा जिला के कुमारखंड प्रखंड में प्रस्तावित रहटा शाखा के लिए पदस्थापित किया गया,जहाँ मुझे ही शाखा प्रभारी के रूप में कार्य करना था।प्रस्तावित रहटा शाखा का उद्घाटन दिनांक 22.11.1980 को होना था।मुझे अविलंब रहटा के लिए प्रस्थान करना था।प्र0 का0 से यह भी कहा गया कि आप पहले कुमारखंड शाखा में चले जाइयेगा, वहा शाखा प्रवन्धक श्री रमेश उपाध्याय जी हैं,वे ही आपको सब ब्यवस्था कर देंगे।मै उसी समय अपना सामान लेके बस से मीरगंज होते हुए शाम को कुमारखंड पहुँच गया।कुमारखंड से रहटा की दुरी लगभग 10km है।रास्ता लगभग ठीक ही था और रिक्सा सवारी मिल जाती थी।रहटा में उस समय तक फर्नीचर भी नहीं पंहुचा था।इसलिए उपाध्याय बाबु रात में कुमारखंड में ही रहने के लिए बोले।मैं भी उन्ही के यहा खाना खाकर रात में वही रह गया।दूसरे दिन 21.11.1980 को पता चला की प्र0 का0 से फर्नीचर रहटा पहुँच रहा है।इसलिए जल्द से जल्द रहटा पहुँच गया और फर्नीचर को जगह पर लगाने के लिए कहा।प्र0 का0 से ही दैनिक मजदूरी पर एक MSW जिसका नाम शिव कुमार पटेल था,रहटा के लिए भेजा गया था।हमलोग दोनों मिलकर लोगों की सहायता से सभी फर्नीचर को जगह पर लगा दिया।शाखा परिसर में एक बड़ा बारमदा, एक बड़ा हॉल और दो छोटा कमरा था।बरामदा और एक कमरे में ही सारे फर्नीचर को adjust कर दिया गया और दो कमरे को हमलोगों के निवास के लिए रखा गया।बरामदा में ग्रिल लगा हुआ था।बैंक में कैसे काम करना है?कैसे बैंक चलाना है?इसका कोई प्रशिक्षण मुझे नहीं दिया गया था।जानकारी मिला था कि उद्घाटन के दिन कोई staff दिया जायेगा,वही सब समझा देगा। दूसरे दिन दिनांक 22.11.1980 को रहटा शाखा के उद्घाटन के दिन श्री बी0 के0 सिंह अपने साथ कई अधिकारियों को लेकर उद्घाटन समारोह के बैनर,मिठाई का पैकेट,खाता खोलने का फार्म,रजिस्टर इत्यादि लेकर बिरजू ड्राइवर के साथ जीप से प्र0 का0 ,पूर्णिया से रहटा पहुँच गए। उधर कुमारखंड से श्री उपाध्याय जी भी श्री केहरी गुप्ता जी ,जो कुमारखंड शाखा के क्षेत्रीय पर्यवेक्षक थे को अपने साथ रहटा पहुँच गए।श्री गुप्ता जी को सात दिनके लिए रहटा शाखा के लिए प्रतिनियुक्त किया गया था।ताकि सात दिन हमारे साथ रहकर हमें बैंक संचालन संबंधी सभी जानकारी दे सकें। श्री बी0 के0 सिंह बाबु ने मेरा नियुक्ति पत्र देखना चाहा।।मै निकालकर दिया।नियुक्ति पत्र देखकर वे बहुत आश्चर्य हो गए।उसमें मेरा नाम पता,वेतन विवरण,पत्रांक,दिनांक अधिकारी का लघु हस्ताक्षर सब कुछ था,सिर्फ अध्यक्ष महोदय का ही हस्ताक्षर नहीं था।सब कोई समझ रहे थे कि यह भूलवश गलती से हो गया है फिर भी वीना हस्ताक्षर का उस कागज का कोई कीमत नहीं।इस नियुक्ति पत्र को हमारे परिवार के कई लोगों ने कई बार देखा -पढ़ा लेकिन काफी संघर्ष के वाद नियुक्ति पत्र पाने की ख़ुशी में अध्यक्ष महोदय का हस्ताक्षर है या नहीं ,इसपर किसी का नजर गया ही नहीं था।श्री बी0 के0 सिंह बाबु द्वारा उठाये गए सवाल पर मेरा भी मन पूरा उदास हो गया।मन ही मन सोचने लगा कि क्या भगवान अभी भी हमारे साथ कोई छल कर रहे हैं या धैर्य का परीक्षा ले रहे हैं। मै चुप चाप उन लोगों के सामने बेवश खड़ा था।लगता था कि अब मैं बेहोश होकर गिर जाऊंगा।माँ पिताजी को क्या जवाब दूंगा? कुछ देर में ही श्रीबी0 के0 बाबू,श्री उपाध्याय बाबु और लोगों ने बिचार विमर्श कर यह समाधान निकाला कि नियुक्ति-पत्र तो सही ही होगा,गलती से अध्यक्ष महोदय का हस्ताक्षर छूट गया है।इसलिए प्रशांत कुमार घोष को आज cash पर नहीं बैठाया जाय,बल्कि उनको बगल में बैठाकर फार्म आदि भरवाने, खाता खोलने में मदद लिया जाय और जबतक Chairman का नियुक्ति पत्र में हस्ताक्षर नहीं हो जाता तबतक cash का काम नहीं लिया जाय।श्री बी0के0 बाबू ने मेरा नियुक्ति पत्र अपने पास रख लिए तकि प्र0 का0 पहुँचकर अध्यक्ष महोदय से हस्ताक्षर करवाकर पुनः स्पेशल मेसेंजर के माध्यम से हमें जल्द भेजा जा सकें।मैं उन्हें अपना नियुक्ति पत्र दे दिया।उद्घाटन समारोह शुरू हुआ,सभी गण्य मान्य अतिथि का भाषण हुआ,खाता खोला गया और अंत में मिठाई का पैकेट बांटकर समारोह का समाप्ति किया गया।इतना अच्छा सामारोह में सब कार्य करते हुए भी मै उदास था।श्री केहरी गुप्ता ने खाता खोलने का सारा कार्य सफलता पूर्वक किया और हमें बगल में बैठाकर कैसे फार्म भरना है,कैसे लेजर में entry करना है,सब समझाते रहे। उदघाटन समारोह समाप्ति पर प्रधान कार्यालय के सभी अधिकारी लोग चले गए।रात भर मुझे निंद नहीं आया न जाने क्या होगा? अध्यक्ष महोदय मेरे नियुक्ति पत्र में हस्ताक्षर करेंगे या नहीं?क्या मुझे पुनः ट्यूशन पढाके ही जीवन गुजरना पड़ेगा?यही सोचता रहा।एक दिन के बाद श्री बी0 के0 बाबू स्पेशल मेजेन्जर द्वारा Chairman साहब का हस्ताक्षर किया हुआ नियुक्ति पत्र भेजवा दिए। इसके लिए उनको बहुत बहुत धन्यवाद्।नियुक्ति पत्र पाकर जान में जान आया।तब मुझे मुझपर भरोसा हुआ कि अब मैं अपने परिवार का देखभाल कर सकता हूँ। अब मैं cashier का पद संभालना शुरू कर दिया। श्री केहरी गुप्ताजी ने सिर्फ सात दिन के deputation में ही आये हुए थे।उसके बाद मुझे ही अकेला शाखा को चलाना था।इसलिए जितना हो सके श्री केहरी गुप्ता बाबु से बैंक संचलन के संबंध में सिख रहा था। गुप्ताजी सात दिन रोज कुमारखंड से रहटा आकर मेरे साथ रहकर जमा-निकाशी के साथ साथ मोटामोटी बैंक का सारा कार्य समझा दिए।श्री केहरी गुप्ताजी मेरे प्रथम गुरु थे ,जिसने मुझे बैंक का basic ज्ञान सिखाया।अपने कर्मक्षेत्र का प्रथम गुरु मै उन्ही को मानता हूँ।उन्हें मेरा प्रणाम।उस समय न्यूनतम 5/-पांच रुपैया से खाता खुल जाता था।उपाध्याय जी पहले से ही रहटा के लोगों के सम्पर्क में थे,इसलिए उदघाटन के दिन अधिक से अधिक खाता खुला और बड़े बड़े पार्टियों का deposit भी अच्छा हुआ था। कुछ दिन तक रात में मैं counter पर ही सोया करता था और शिबकुमार मेझपर चटाई बिछाकर सोता था।खाना भी कुछ दिन तक मकान मालिक श्री सियाराम चौधरी के यहा से आया करता था।बाद में मेसेंजर ही बनाया करता था।कुछ दिन बाद मकान मालिक के यहाँ से दो चौकी भी सोने के लिए हम लोगों को दिया गया।सात दिन बाद श्री केहरी गुप्ताजी कुमारखंड वापस चले गए। मै गौर किया कि बहुत से ग्राहक जमा से ज्यादा निकासी करने आते हैं। यानी उदघाटन के दिन जिन लोगों ने अधिक से अधिक जमा किये थे,उन्ही लोगों ने अधिक से अधिक निकासी भी करने आने लगे।अधिक निकासी के चलते हाथ नकदी घटने लगा।मै गुप्ताजी से पूछा था कि “सर लोग इतना निकासी करते हैं तो बैंक चलेगा कैसे? वे बोले बैंक ऐसे ही चलता है।अधिक लोग जमा करते हैं और कम लोग निकासी करते हैं।बैंक के सिद्धांत के अनुसार 40% निकासी होता है और 60%राशि बैंक में ही जमा रह जाता है।उस राशि को बैंक ब्यापारी को अधिक सूद पर ऋण देकर लाभ कमाती है।जो लोग हमारे पास राशि जमा रखते हैं उसमें कम सूद देते हैं।सूद कमाने और सूद देने में जो अंतर होता है,वही बैंक का कमाई है यानि लाभ है। इसी लाभ राशि से हमारा Salary,House rent,Electric bill का भुकतान किया जाता है।इतना सारा भुकतान करने के बाद भी अगर लाभ का राशि बचता है तो वही बैंक का साल भर का Profit होता है।इसी सिद्धान्त पर बैंक चलता है।मै भी यह बात कुछ कुछ जनता था लेकिन अब practical में देख रहा था।मकान मालिक ने बैंक परिसर का अधूरा कार्य पूरा करने हेतु 10000/-रु0 के लिए प्र0 का0 ऋण आवेदन भेजा था,जो स्वीकृत होकर आ चुका था,जिसे भुकतान भी करना था।माह पूरा होने पर वेतन का भी भुकतान करना था।मैं रात भर सोचने लगा कि सेफ में तो depositor का पैसा रखा है, जिसे वे लोग किसी भी दिन निकाल ले रहे थे।इसलिए उनलोगों के लिए तो हमेशा सेफ में नकद राशि रखना ही था।माकन मालिक को ऋण राशि का भुकतान और मेरा वेतन का भुकतान इत्यादि अगर depositor का सेफ में रखे नकद राशि से किया गया और depositor निकासी करने आ गया तो कहाँ से उन लोगों को पैसा देंगे? हमको तो सब depositor मिलकर मारने दौड़ेगा।यह दिमाग में आते ही मैं सोचने लगा कि मैं इस बैंक में आकर पूरी तरह फॅस गया ,अब मैं क्या करूँ?दिमाग में यह बात आने के बाद रात भर निंद नहीं आया।ऐसा नौकरी नहीं करना है। इस से अच्छा तो ट्यूशन करना ही था।कोई झंझट नहीं था।मैं अपनी बड़ी बहन जो दुर्गापुर स्टील प्लांट के हिंदी सेल के प्रभारी थी,उसे चिठ्ठी लिखा कि मैं यह नौकरी नहीं कर सकता।इसमें जान जाने का खतरा है,तुम मेरे लिए बंगाल में ही कोई दूसरा नौकरी का तलाश करो।दूसरे दिन कुमारखंड जाकर मै उपाध्याय जी से मेरे चिंता का कारण बताया और नौकरी छोड़ने का भी बात कहा। श्री उपाध्याय बाबु ने मेरी सारी समस्या और चिंताओं को सुनकर वे समझाए कि पैसा का चिंता नहीं करना है,जितना पैसा का जरुरत होगा एक letter pad में लिखकर देना और यहॉ से ले जाना। HO A/C के through रुपैया दे दिया जायेगा।बैंक में हमलोग इसी तरह एक दूसरे शाखा को मदद कर सकते हैं।उपाध्याय बाबु का बात सुनकर ऐसा लगा जैसे कोई देवता मुझे वरदान दे रहे हैं और मेरा समस्या एक क्षण में दूर कर दिए।बैंक में यह ब्यवस्था जानकर मन में बहुत ख़ुशी हुआ कि जरुरत पड़ने पर कभी भी रुपैया मिल सकता है।यह बात श्री केहरी बाबु मुझे नहीं बताये थे।अब मुझे नौकरी छोड़ने का चिंता हमेशा के लिए ख़त्म हो गया और मन लगाकर बैंक के हित में सारा उर्या लगा दिया। 20 नवम्बर से 30 नवम्बर यह 10 दिन हमारे मन में जिस तरह का तूफान उठ रहा था, मन को विचलित कर रहा था वह अब पुर्ण शांत हो चूका था। चार माह मैंने अकेले ही बैंक चलाया।चार माह बाद श्री बीरेंद्र प्रसाद चौधरी,लिपिक सह खजांची ,जिनका घर पूर्णिया जिले केचंपानगर है,हमारे रहटा शाखा में योगदान दिया।तब से हम दोनों मिलकर खूब मजे से विना टेंसन के बैंक चलाया। चंपानगर है,हमारे रहटा शाखा में योगदान दिया।तब से हम दोनों मिलकर खूब मजे से विना टेंसन के बैंक चलाया। प्रशांत कुमार घोष,मधेपुरा।

जयंती: शहीद-ए-आजम भगत सिंह

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Spread the love भगत सिंह का जन्म 27/28 सितंबर 1907 को लायलपुर जिले के बंगा में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है। उस समय उनके चाचा अजीत सिंह और श्‍वान सिंह भारत की आजादी में अपना सहयोग दे रहे थे। ये दोनों करतार सिंह सराभा द्वारा संचालित गदर पाटी के सदस्‍य थे। भगत सिंह…

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मन की बात

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तू जिंदगी को जी, समझने की कोशिश न कर: प्रियदर्शी

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Spread the love तू जिंदगी को जी,उसे समझने की कोशिश न कर सुन्दर सपनो के ताने बाने बुन,उसमे उलझने की कोशिश न कर चलते वक़्त के साथ तू भी चल,उसमे सिमटने की कोशिश न कर अपने हाथो को फैला, खुल कर साँस ले,अंदर ही अंदर घुटने की कोशिश न कर मन में चल रहे युद्ध…

जयंती: पंडित दीनदयाल उपाध्याय

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Spread the loveनिवाला बड़ी बेचैनी से रात कटी।बमुश्किल सुबह एक रोटी खाकर, घर से अपने शोरूम के लिए निकला।आज किसी के पेट पर पहली बार लात मारने जा रहा हूँ।ये बात अंदर ही अंदर कचोट रही है।ज़िंदगी में यही फ़लसफ़ा रहा मेरा कि, अपने आस पास किसी को, रोटी के लिए तरसना ना पड़े,पर इस…

आईए जानते हैं क्या है ज्योतिष

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Spread the love ज्योतिष की जन्मस्थली निर्विवाद रूप से भारत को माना गया है. इसी भारतभूमि पर हजारों वर्ष पूर्व हमारे महान ऋषि-मनीषियों नें ज्योतिष के मूल तत्वों का प्रतिपादन किया. ज्योतिष ही एकमात्र ऐसा विज्ञान या शास्त्र है, जिससे मानव के आने वाले जीवन के रहस्यों की जानकारी प्राप्त होती है. ज्योतिष के तीन…

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