Author: नमस्ते Bharat

इस्लामिक रक्तबीज को कैसे रोकेंगे ऋषि सुनक

*इस्लामिक रक्तबीज को कैसे रोकेंगे ऋषि सुनक* *ऋषि सुनक तो पॉलिटिक्स चेंजर हैं* ================= *ऋषि सुनक का ब्रिटेन के प्रधानमंत्री पद तक पहुंचना एक इतिहास को बदलना ही नहीं बल्कि एक राजनीतिक चमत्कार जैसा भी है। निसंदेह तौर पर ऋषि सुनक पॉलिटिक्स चेंजर बन गए हैं ।* ठीक उसी प्रकार, जिस प्रकार से 2008 में…

क्या है आभासी मुद्रा [Crypto Currency] कैसे करते हैं व्यापार: कमा सकते हैं प्रचुर धन

दुनिया के किसी भी व्यक्ति, संस्था तथा देश को अपनी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए और आपसी लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए एक मुद्रा (करेंसी) की जरूरत होती है ताकि उसका उपयोग वह सुचारू रूप से कर सके। इसलिए, प्रत्येक देश की अपनी अलग-अलग मुद्रा होती है, जैसे-भारत में रुपया, अमेरिका में डॉलर आदि। दरअसल, यह भौतिक करेंसी होती हैं जिसे आप देख सकते हैं, छू सकते हैं और नियमानुसार किसी भी स्थान या देश में इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन क्रिप्टो करेंसी इससे अलग होती है जो एक डिजिटल करेंसी है। इसे आप न तो देख सकते हैं, न छू सकते हैं, क्योंकि भौतिक रूप में क्रिप्टो करेंसी का मुद्रण नहीं किया जाता। इसलिए इसे आभासी मुद्रा कहा जाता है। पिछले कुछ सालों में ऐसी करेंसी काफी प्रचलित हुई है।

तो आइए जानते हैं कि आखिर क्या है क्रिप्टो करेंसी ?

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क्रिप्टो करेंसी एक ऐसी मुद्रा है जो कंप्यूटर एल्गोरिथ्म पर बनी होती है। यह एक स्वतंत्र मुद्रा है जिसका कोई मालिक नहीं होता। यह करेंसी किसी भी एक अथॉरिटी के काबू में भी नहीं होती। अमूमन रुपया, डॉलर, यूरो या अन्य मुद्राओं की तरह ही इस मुद्रा का संचालन किसी राज्य, देश, संस्था या सरकार द्वारा नहीं किया जाता। यह एक डिजिटल करेंसी होती है जिसके लिए क्रिप्टोग्राफी का प्रयोग किया जाता है। आमतौर पर इसका प्रयोग किसी सामान की खरीदारी या कोई सर्विस खरीदने के लिए किया जा सकता है।

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आपको पता होना चाहिए कि सर्वप्रथम क्रिप्टो करेंसी की शुरुआत 2009 में हुई थी जो “बिटकॉइन” थी। इसको जापान के सतोषी नाकमोतो नाम के एक इंजीनियर ने बनाया था। प्रारम्भ में यह उतनी प्रचलित नहीं थी, किन्तु धीरे-धीरे इसके रेट आसमान छूने लगे, जिससे यह सफल हो गई। देखा जाए तो 2009 से लेकर वर्तमान समय तक लगभग 1500 प्रकार की क्रिप्टो करेंसी बाजार में मौजूद हैं, जो पियर टू पियर इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के रूप में कार्य करती है।

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मोहन दास को महात्मा गाँधी बनाने वाले व्यक्ति थे “राजकुमार शुक्ल”: सुशील जायसवाल

जो भूमिका हनुमान की रही राजा राम को मर्यादा पुरुषोत्तम बनाने में तथा जो भूमिका भामाशाह की रही राणा प्रताप को महाराणा बनाने में, मेरा मानना है कि ठीक वही भूमिका निभाई गई थी चम्पारण के पण्डित राजकुमार शुक्ल द्वारा मोहनदास करमचंद गांधी को महात्मा बनाने में। लेकिन विडम्बना देखिए कि इतनी बड़ी कालजई कीर्ति…

परमात्मा को पाना बिजली का स्विच दबाकर बिजली पाने की तरह आसान है : राजीव जायसवाल

परमात्मा को पाना ऐसा ही है , जैसे बिजली का स्विच दबा कर बिजली का प्रकाश होना. लेकिन हम सब ने परमात्मा को पाना बहुत जटिल बना दिया है । अगर हम कमरे में पंखा या बिजली चलाने के लिए , स्विच दबाने की बजाए , यह समझने में अपना दिमाग़ खपा दें कि घर…

क्या से क्या हो गया, कितने बदल गए हैं हम और आप: प्रियदर्शी

खैर कल सुबह उठकर एक बार इसका जायज़ा लीजियेगा कि कितने घरों में अगली पीढ़ी के बच्चे रह रहे हैं और कितने बाहर निकलकर नोएडा, गुड़गांव, पूना, बेंगलुरु, चंडीगढ़,बॉम्बे, कलकत्ता, मद्रास, हैदराबाद, बड़ौदा जैसे बड़े शहरों में जाकर बस गये हैं। कल आप एक बार उन गली मोहल्लों से पैदल निकलिएगा जहां से आप बचपन…

क्या मिला क्या खोया कुछ याद नहीं: डॉ बीना सिंह “रागी”

संसार के भीड़ के कोलाहल में तन और धन चलता जा रहा है खामोशी से मौन होकर बिन बोले उम्र से एक-एक दिन निकलता जा रहा है क्या मिला क्या खोया कुछ याद नहीं कुछ पाने की अब कोई फरियाद नहीं सब कुछ तो है मेरे पास मेरी सांसे मेरी धड़कन मेरे एहसास इससे बड़ी…

हे माधव गोविन्द मुरारी: राजीव जायसवाल

हे माधव गोविंद मुरारी तुझ बिन कवन सहाय । तू मेरे ह्रदय का धड़क धड़कना तू मेरी श्वास चलाय । तू मेरे अंतर अनहद बाजे जीवन ज्योति जलाए नव माहा माँ गरभ में राखे अमृत पान कराए । तू मेरे रक्त में रक्त बन बहे उदर की क्षुधा मिटाए रात नींद में स्वप्न दिखाए दिवस…

ओ मेरे कृष्ण कन्हैया: डॉ बीना “रागी”

          ओ मेरे कृष्ण कन्हाई अब एक बार आ जाओ हम सबकी बिकट व्यथा धरा में आकर मिटा जाओ समझ मेरे नहीं आता कैसे परखे कौरव और पांडव को जाने कैसे देव और दानव को विकट विपदा आन पड़ी है द्रौपदी हर चौराहे हर कदम पर होकर भयभीत जान पड़ी है…