सब कुछ लुटा के जागा है बंगाल का हिंदू
बंगाल बंकिम चंद्र चटर्जी की भूमि है जिन्होंने संपूर्ण भारत वर्ष को देशप्रेमियों का सबसे प्रिय नारा दिया.. वंदेमातरम.
लेकिन बंगाल में कभी भारत माता की वंदना सही मायने में हो ही नहीं पाई क्योंकि यहाँ के हिंदुओं ने वंदेमातरम और आनंद मठ के संदेश को कभी ठीक से समझा ही नहीं.
अगर बंगाल के हिंदू इस लेख को पढ़ रहे हैं तो इन कटु सत्यों के लिए मैं पहले ही उनसे क्षमा माँगता हूँ लेकिन सत्य तो यही है कि 1947 में बंगाल का विभाजन हुआ… कलकत्ता में दंगे हुए… हज़ारों हिंदू मारे गए.. बँटवारे में हज़ारों हिंदुओं की जान गई… बांग्लादेश में भी लाखों-लाख हिंदू अब तक अपनी जान गँवा चुके हैं. लेकिन इतने अत्याचार खुली आँखों से देखने के बाद भी बंगाल का हिंदू नहीं जागा.
बंगाल के हिंदू सबसे पहले बँटवारे क पाप करने वाली पार्टी कांग्रेस पार्टी को जिताते रहे और जब उनका कांग्रेस से मोहभंग हुआ तो उन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी को जिताना शुरू कर दिया जिसकी विचारधारा… कांग्रेस से भी ज्यादा घातक है. और जब कांग्रेस से भी बंगाल के हिंदू का जी ऊब गया तो उसने ममता बनर्जी को जितवाना शुरू कर दिया.
अब आज की तारीख़ में जब पश्चिम बंगाल में विधर्मियों की आबादी क़रीब 25 % हो चुकी है और बांग्लादेशी घुसपैठिए… क़ायदे से बंगाल की धरती में घुस चुके हैं तब जाकर हिंदू जागा है.
सबसे ज्यादा पीड़ा वाली बात ये है कि हिंदू खुद से जागरूक नहीं हुआ… उसे झटके तब लगने शुरू हुए जब ममता बनर्जी ने खुलकर तुष्टीकरण की राजनीति शुरू कर दी.
अप्रैल 2012 में ममता बनर्जी ने ये घोषणा की थी कि वो हर इमाम को ढाई हज़ार रुपए ग्रांट देंगी और हर मुअज्जिन को पंद्रह सौ रुपए की ग्रांट देंगी. पश्चिम बंगाल में इनकी संख्या हज़ारों में थी और ये सारा पैसा हिंदू टैक्सपेयर की ही जेब से ही दिया जाना था. कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता बनर्जी के इस फ़ैसला को ग़लत बताया था.
इसके अलावा अक्टूबर 2016 में ममता बनर्जी ने एक आदेश पारित किया और 12 अक्टूबर को शाम 4 बजे के बाद दुर्गा पूजा का प्रतिमा विसर्जन नहीं हो सकता है क्योंकि अगले दिन मुहर्रम था . इस फैसले को भी कलकत्ता हाईकोर्ट ने गलत बताया.
इसके अलावा ममता बनर्जी ने NRC और CAA का भी खुलकर विरोध किया और इसके ख़िलाफ़ रैलियाँ भी कीं जबकि बांग्लादेशी घुसपैठ पश्चिम बंगाल का बड़ा मुद्दा है .
इतनी ठोंकरे खाने के बाद भी हिंदू जागा है या फिर नहीं ये इस साल चुनाव के बाद पता चलेगा.
बंगाल भारत के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की सबसे बड़ी धरती है और ये जगह बंकिम चंद्र चटर्जी और श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जन्मभूमि है. इस महान पुण्य भूमि को मुक्त करवाने के लिए आप सभी बड़े अभियान में जुटें… प्रचार करें और इस लेख को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचाएँ.
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