अगर नरेंद्र मोदी सरकार आपकी सुरक्षा करने में सक्षम नहीं है तो फिक्र की कोई बात नहीं है। आपके पास कोर्ट जाने का रास्ता है जहां आप हिन्दू होने के नाते अपनी सुरक्षा की गुहार लगा सकते हैं। कोर्ट आपसे पूछेगा कि संविधान की किस धारा के तहत हम आपको सुरक्षा प्रदान करें। आपको ये जानकर खुशी होगी कि संविधान में ‘हिंदू धर्म’ शब्द ही नहीं है। जब संविधान बनाया गया तो कहीं भी ‘हिन्दू धर्म’ या ‘धर्म’ शब्द को स्थान तक नहीं दिया गया। ‘रिलीजन’ शब्द लिखा गया जो सेमेटिक लोगों के लिए लिखा गया है, मगर धर्म नहीं । संविधान सभा के सदस्य आचार्य रघुवीर ने उस वक्त कहा था कि संविधान में धर्म शब्द क्यों शामिल नही किया गया है, धर्म और रिलीजन दोनों का अर्थ बिल्कुल अलग है और भविष्य में इसके परिणाम हिंदुओं के लिए बहुत खतरनाक होंगे।

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भारत का संविधान भारत के नागरिकों को स्पष्ट रूप से दो हिस्सों में बांटता है, अल्पसंख्यक और गैर अल्पसंख्यक। सेमेटिक मज़हबों को अल्पसंख्यको का दर्जा देकर धर्म प्रचार और धर्म परिवर्तन के अधिकार दिए गए। लेकिन बहुसंख्यक जैसे शब्द ही नही लिखे गए। रिलीज़न को प्रोटेक्शन दिया गया मगर धर्म रक्षा जैसी किसी धारणा को काउंट तक नहीं दिया गया। 562 रियासतें औऱ रजवाड़े जिनकी ज्यादातर आबादी बहुसंख्यक हिन्दू थी और जो भारत मे शामिल हुए थे उन्हें ये तक नहीं बताया गया कि एक ऐसा संविधान, एक ऐसा स्टेट बनने जा रहा है जिसमें धर्म रक्षा ही नहीं होगी। धर्म रक्षा समाज और व्यक्ति का अपना कार्य होगा, स्टेट आपके लिए फिक्रमंद नही होगा। आपकी सुरक्षा स्टेट की चिंता नही है क्योंकि ये सेकुलर स्टेट है लेकिन वही संविधान, वही स्टेट अल्पसंख्यको की सुरक्षा के लिए सबसे पहले खड़ा होता है।

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संविधान के पापों में सबसे बड़ा पाप ये है कि उसमें अल्पसंख्यक शब्द तो है मगर बहुसंख्यक शब्द ही नही है। एक मुस’लमान कोर्ट का दरवाजा दो रूपों में खटखटा सकता है सिटीजन ऑफ इंडिया के रूप में और मेंम्बर ऑफ माइनॉरिटी के रूप में । उसको दोनो तरह के अधिकार है। हिन्दू को सिर्फ वही अधिकार हैं जो उसे सिटीजन ऑफ इंडिया के तहत उसे मिले है, मेम्बर ऑफ मेज्योरिटी के रूप में उसके पास कोई अधिकार नहीं है। ऐसी कोई धारा संविधान में नहीं है जिसके तहत आपको स्टेट सुरक्षा दे। संविधान में हिन्दू जैसी किसी प्रजाति का जिक्र ही नहीं है और न ही गृह मंत्रालय को ये जानकारी है कि हिन्दू कौन लोग है, हिन्दू की परिभाषा क्या है।

संविधान सीधे तौर पर भारत के हिंदुओं को दूसरे दर्जे का नागरिक बनाता है। आप संविधान में बदलाव करके हिंदुओं की सुरक्षा की गारंटी की बात भी कर दें तो सेकुलर गैंग मरने मारने पर उतारू हो जाता है जबकि इसी संविधान में अब तक सौ से ज्यादा बदलाव हो चुके है। सेकुलर गैंग संविधान को धर्म ग्रन्थ से बढ़कर मानता है क्योंकि ये संविधान अपने मूल स्वभाव से ही हिन्दू विरोधी है। जबकि ये मात्र एक राजनैतिक दस्तावेज है, कानून संहिता है। खुद अंबेडकर इसे जलाने की बात कह चुके थे। आज हिन्दू एक वैश्विक अल्पसंख्यक सभ्यता है जो अपनी विशाल जनसंख्या, क्षेत्रफल और इतिहास की वजह से अब तक विजिबल है। जिस एक मात्र स्टेट में हिन्दू सिकुड़ कर रह गए है उसी स्टेट का संविधान हिंदुओं की हत्या को कोई चिंता विषय नही समझता इसलिए हिंदुओ का कोई अंतरराष्ट्रीय एलाई नही है, हिंदुओ के लिए कहीं कोई अंतरराष्ट्रीय कम्पेनिंग या फंडिंग नहीं होती और वो शिकारी धर्मों के आगे पूरी तरह असहाय हैं।

आज जब दूसरी सभ्यताएं खुद को वर्ड कम्युनिटी औऱ उम्मा के रूप में देखती है तो बेहतर है संविधान में अल्पसंख्यक की परिभाषा फिर से तय कर दी जाए। या तो सड़क पर उतर कर संविधान में बदलाव की आवाज़ उठाइए या एसी चलाकर मुर्दों की तरह चैन से सोते रहिए। आपकी बिजली का बिल रिंकू शर्मा ने भर दिया है।।

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