कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी के त्रिवेंद्रम में दिए बयान के ऊपर भाजपा के कई नेता उनसे नाराज हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा से लेकर अमेठी सांसद स्मृति ईरानी ने उन्हें खरी-खरी सुनाई है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तो राहुल को लेकर ये तक कहा है कि वह जहाँ भी कदम रखते हैं, वहाँ पार्टी का बंटाधार होता है।

मालूम हो कि राहुल गाँधी ने त्रिवेंद्रम में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा था, “मैं 15 साल तक उत्तर भारत में सांसद था। मुझे एक अलग तरह की राजनीति की आदत हो गई थी। मेरे लिए केरल आना बेहद नया था क्योंकि मुझे अचानक लगा कि यहाँ के लोग मुद्दों में दिलचस्पी रखते हैं और जमीनी तौर पर मुद्दों के विस्तार में जाने वाले हैं।”

https://youtu.be/Nfu6UeObyMQ?t=161

इस बयान के बाद अमेठी से वर्तमान सांसद स्मृति ईरानी ने राहुल गाँधी के लिए ‘एहसान फरामोश’ शब्द का इस्तेमाल किया। साथ ही कहा कि इनके बारे में तो दुनिया कहती है- थोथा चना बाजे घना।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिखा, “सनातन आस्था की तपस्थली केरल से लेकर प्रभु श्री राम की जन्मस्थली उत्तर प्रदेश तक सभी लोग आपको समझ चुके हैं। विभाजनकारी राजनीति आपका राजनीतिक संस्कार है। हम उत्तर या दक्षिण में नहीं, पूरे भारत को माता के स्वरूप में देखते हैं।”

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा लिखते हैं, “कुछ दिन पहले तक यह पूर्वोत्तर में रहकर भारत के पश्चिमी हिस्से के ख़िलाफ़ जहर उगल रहे थे। आज दक्षिण में जाकर उत्तर के ख़िलाफ़ जहर उगल रहे हैं। विभाजनकारी राजनीति काम नहीं करेगी राहुल गाँधी। लोगों ने ऐसी राजनीति करने वालों को नकार दिया है। आज देख लो गुजरात में क्या हुआ।”

https://youtu.be/tWC-bQdm4_o?t=89

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान लिखते हैं, “जहाँ-जहाँ पाँव पड़े राहुल गाँधी के, तहाँ-तहाँ कॉन्ग्रेस का बंटाधार! राहुल जी ने पहले उत्तर भारत को कॉन्ग्रेस मुक्त कर दिया, अब दक्षिण को चले हैं! हमारे और जनता के लिए पूरा देश एक है। कॉन्ग्रेस भारत को उत्तर और दक्षिण में बाँटना चाहती है, जनता ऐसे प्रयासों को सफल नहीं होने देगी।”

गौरतलब है कि राहुल गाँधी को पिछले लोकसभा चुनावों में स्मृति ईरानी से करारी शिकस्त मिली थी। वह अमेठी में साल 2004 से सांसद थे मगर, 2019 में ये सीट ईरानी ने उनसे छीन ली। हालाँकि 2019 में ही उन्होंने केरल के वायनाड से चुनाव लड़ा था, जहाँ उन्हें जीत मिली। अब अमेठी हाथ से जाने के बाद वह उत्तर भारत के लिए देश के अलग-अलग कोने में उल जुलूल बाते कर रहे हैं।

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