
खास तौर से बिहार के परिपेक्ष्य में जहाँ खेती के क्षेत्र में ढाँचागत संरचना का बेहद अभाव है उस परिस्थिति में परम्परागत विधि से खेती करना बेहद खर्चीला व घाटा का सौदा बनता जा रहा है। उपज खलिहान से उठाकर जब किसान के घर में आ भी जाता है तो मंडी की व्यवस्था नहीं होने और गाँव से लेकर प्रखंड मुख्यालय तक लचर व लाचार पैक्स( PACS ) तथा बिचौलिओ के बोलबाला के कारण सही किसान को सरकारी समर्थन मूल्य कदापि नहीं मिल पाता है । यही कारण है कि बड़ा किसान खेती छोड़ व्यवसाय और नौकरी की ओर रुख कर लिए हैं और छोटा किसान महानगरों में जाकर मजदुर बन जा रहे है ।
आखिर इसका क्या कोई समधान है ????????????????????
हाँ है और वह यह है कि आधुनिक वैज्ञानिक विधि से खेती में होनेवाले खर्च (cost of cultivation) को कम कर दिया जाए जिससे खेती घाटे के बदौलत लाभ का व्यवसाय बन जाए । इसके लिए zero tillage मशीन की सहायता से धान की सीधी बुआई एक चमत्कारिक पद्धति है क्योंकि इस विधि से 20 से 40 प्रतिशत पानी की बचत होती है , बीचड़ा ( nursery ) नहीं बनाना पड़ता , महंगा लेवाठ या कदवा करने की आवश्यकता नहीं , रोपाई के लिए मजदूरों की आवश्यकता नहीं और फसल की कटाई 10 – 15 दिन पहले जिससे रबी की अगात खेती भी संभव हो जाती है। इस विधि से प्रति एकड़ 4 से 5 हजार रुपये की बचत होती है जिसके कारण किसान को अधिक लाभ होता है ।