जिंदगी भर प्रयास ही प्रयास

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प्रयास


अँधेरे कमरे में बिछावन पर लेटे हुए सिरहाने पर सर रख सोने
का प्रयास
दिन भर हुई मुलाकातों में
छुपे प्रश्नो को ढूंढने का प्रयास
हर परीक्षा में टॉप करने का प्रयास
हार कर सब कुछ जीता हुआ दिखाने का प्रयास
बड़ा घर बड़ी गाड़ी का प्रयास
बड़ा बैंक बैलेंस बनाने का प्रयास
जमीन छोड़ आसमान में उड़ जाने का प्रयास
हमेशा दूसरों से अपने को ऊँचा दिखाने का प्रयास
धकेल कर पीछे सबको आगे बढ़ने का प्रयास
खोकर भीड़ में अकेलेपन को छुपाने का प्रयास
दुखों के बीच हंसने का प्रयास
आंसुओं को छुपा ठहाके लगाने का प्रयास
घुटते हुए दम में साँस लेने का प्रयास
बिखरी हुई जिंदगी को समेटने का प्रयास
बिछी हुई बाजी को जितने का प्रयास
बस प्रयास ही प्रयास

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3 comments

  1. रविशंकर प्रसाद, नई दिल्ली - Reply

    अतिसुन्दर कविता, नमस्ते भारत में प्रकाशित सभी रचना एक से बढ़कर एक है मुख्य संपादक की रचना और संंकलन उच्च श्रेणी का होता है.

  2. शैलेंद्र नन्दन, इन्दौर - Reply

    बहुत बढ़िया सर, इस प्रकार की रचना आजकल बहुत कम पढ़ने के लिए मिलता है. आभार

  3. विप्लव दास, भुवनेश्वर - Reply

    जीवन भर लोग भागमभाग करते रहते हैं परंतु जिस सूख के लिए अंधी दौर लगाते हैं पर मिलता क्या है, बेचैनी और अशांति.

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