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मैंने ईश्वर से शक्ति माँगी थी, ताकि मैं कुछ प्राप्त कर सकूँ

उसने मुझे कमजोर बनाया, ताकि मैं दूसरों की सेवा कर सकूँ

मैंने सेहत माँगी थी,

ताकि मैं बड़े काम कर सकूँ,

मुझे दुर्बलता मिली,

ताकि मैं अच्छे काम कर सकूँ.

मैंने धन दौलत माँगी थी, ताकि मैं खुश रह सकूँ,

मुझे गरीबी मिली,

ताकि मैं विद्वान बन सकूँ

मैंने प्रतिष्ठावान होना माँगा था,

ताकि लोग मुझे सराहें,

मुझे असहाय बनाया,

ताकि मैं दूसरों की जरूरत महसूस करूँ…… मैंने सब चीजें माँगी थी,

ताकि मेरा जीवन खुशहाल हो,

मुझे केवल जीवन मिला, ताकि मैं हर चीज से खुशियाँ पा सकूँ…

मैंने जो भी माँगा नहीं मिला,

मगर वह सब कुछ मिला जिसकी आशा की थी..

 

श्रेया राहुल आनंद

पुनःप्रकाशित : लेखिका की यह कविता पूर्व में “प्रतीक्षा” पत्रिका के जून 2005 अंक प्रकाशित हुआ था

 

2 thoughts on “आत्मावलोकन”
  1. आत्मावलोकन वास्तव में आत्मा का अवलोकन है, धन्यवाद नमस्ते भारत के सम्पादकीय टीम इतनी अच्छी-अच्छी रचना प्रकाशित करने के लिए.

  2. मैनें जो भी मांगा नही मिला, लेकिन वह सबकुछ मिला जिसकी आशा थी. आस्था और विश्वास से भरी कविता अतिसुन्दर।

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