आइए जानते हैं रेणु देवी उप मुख्यमंत्री के बारे में

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सन्दर्भ के लिए : पुराना फाइल वीडियो संलग्न :

रेणु देवीजी का जीवन काफी संघर्षपूर्ण रहा है. इनकी शादी वर्ष 1973 में हुई थी परन्तु इनका वैवाहिक जीवन बहुत लम्बा नहीं चल सका. वर्ष 1979 में गंभीर बीमारी के कारण हो गया. रेणुजी को दो संतान एक पुत्र तथा एक पुत्री है. बेतिया से चौथी बार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंची हैं. रेणुजी पूर्व में बिहार मंत्रिमंडल मेँ भी रह चुकी हैं.

नीतीश कुमार की अगुवाई में बनने वाली नई सरकार में बीजेपी विधायक रेणु देवी को उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उत्तर प्रदेश की तर्ज पर बिहार में दो उप मुख्यमंत्री का पद भाजपा पिछड़ा एवं अतिपिछड़ा वर्ग के लोगों के बीच अपनी पैठ को मजबूत करना चाहती है. रेणु देवी नोनिया समाज से
इस खबर से बिहार का नोनिया समाज काफी उत्साहित है। रेणु देवी को सरकार में इतना अहम पद दिए जाने की खबर से देश दुनिया में अचानक से लोग नोनिया समाज के बारे जानने समझने को उत्सुक दिख रहे हैं।
नोनिया समाज के बारे में एक संक्षिप्त जानकारी दे रहे हैं। यह समाज स्वय को महान सम्राट पृथ्वीराज चौहान का वंशज मानता है. जिन्होंने आक्रमणकारी मोहम्मद गौरी के खिलाफ वीरता के साथ युद्ध किया था। नोनिया समाज के लोग खुद को इसी महान सम्राट का खुद को वशंज मानते हैं। इस समाज के लोग मानते हैं कि उन्होंने 800 से 1192 ईस्वी के बीच भारतवर्ष में मुस्लिम आक्रमणकारियों को आने से रोका।
नोनिया समाज के लोग मानते हैं कि ये कभी उत्तर-पश्चिमी भारत के शासक रहे अजमेर के राजा सोमेश्वर चौहान की अजेय सेना का हिस्सा रहे। उस वक्त ये लोग 13-14 राजवंशों के क्षत्रिय सेनाओं में अग्निवंशी, चंन्द्रवंशी, नागवंशी और सूर्यवंशी लड़ाके के नाम से जाने जाते थे। औरंगजेब के शासन के खिलाफ भी नोनिया समाज के लंबे समय तक संघर्ष किया।

अंग्रजों के जमाने में सबसे ज्यादा शोषण हुआ अंग्रेजों ने ताकत के बूते इस समाज के लोगों को नमक उत्पादन और नील की खेती में लगाया। जहां से इनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ती चली गई।

अंग्रेजों के दौर में शोषण होने के चलते आजाद भारत में भी नोनिया समाज की हालत खराब ही रही है। बिहार में इस जाति को बेलदार जाति समूह में माना जाता है। गांवों में आमतौर से ये जातियां ईंट वगैरह बनाने, खेती के काम जैसे कठिन परिश्रम वाले कर्म करते हैं। इसके अलावा नोनिया समाज के कुछ लोग फेरी का भी काम करते हैं। उदाहरण के तौर पर गांवों में घूमकर प्लास्टिक के हल्के फुल्के सामान बेचना, हवा मिठाई बेचना आदि।

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