सहर्षा के कोपड़िया गांव से आकर कटिहार सदर के मिरचाईबाड़ी में बसे एक साधारण व्यावसायिक किसान परिवार श्री गंगा प्रसाद भगत के घर वर्ष 1956 में एक यशस्वी बालक का जन्म हुआ जिसका नाम तारकिशोर प्रसाद है. तारकिशोर प्रसाद बचपन से ही तेज तर्रार और मेधावी रहे हैं. बाल्यकाल में ही तारकिशोर प्रसाद राष्ट्रीय स्वंसेवक संघ से जुड़ गए छात्र जीवन में विद्यार्थी परिषद् में काफी सक्रिय रहे तथा जिला प्रमुख के दायित्व का निर्वहण किया। वर्ष 1974 बिहार में जयप्रकाश नारायण जी द्वारा तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कुशासन के विरुद्ध जब छात्र आंदोलन हुआ तब कटिहार में तारकिशोर ने इस आंदोलन में अदृश्य रहते हुए बढ़ चढ़कर भाग लिया।
उल्लेखनीय है की तारकिशोर प्रसाद प्रत्यक्ष रूप से भारतीय मजदूर संघ में नहीं थे परन्तु कटिहार में भारतीय मज़दूर संघ के विकास में सदैव इनका भरपूर सहयोग रहा.
छात्र जीवन के पश्चात् इन्होने हमेशा सामाजिक कार्यों में अपनी अहम् भूमिका का निर्वहण किया। तदुपरांत भारतीय जनता पार्टी में एक साधारण कार्यकर्ता के रुप में प्रवेश करने के उपरांत अपने सामाजिक गतिविधियों संघ एवं पार्टी के प्रति निष्ठां के बल पर अपनी पहचान बनाया तथा पार्टी नेतृत्व ने इन्हें कटिहार विधानसभा के लिए उपयुक्त प्रत्यासी समझा तथा वर्ष 2005 में इन्हें भाजपा का प्रत्याशी बनाया। इस चुनाव में इनका सामना राजद के कद्दावर नेता डॉ रामप्रकाश महतो से हुआ जिसे पराजित कर पहली बार विधान सभा में अपना स्थान बनाया. पुनः 2010 तथा 2015 में कटिहार की जनता ने इनको विधान सभा भेजा. उल्लेखनीय है की 2015 में जनता दल यूनाइटेड का राष्ट्रीय जनता दल एवं कांग्रेस के साथ गठबंधन था तथा देश में मोदी लहर के बावजूद बिहार में भाजपा की स्थिति नाजुक थी. इस चुनाव में भाजपा का चुनाव परिणाम आशा के अनुरूप नहीं रहा तथा बड़े बड़े दिग्गज पराजित हो गए लेकिन इसका प्रभाव तारकिशोर प्रसाद पर नहीं पड़ा तथा कटिहार की जनता ने तीसरी बार इनपर विश्वास जताया और विधान सभा भेजा.
अब आया 2020 की विधान सभा चुनाव का समय, इस बार भी अनेक भाजपा नेता प्रत्यासी बनने की दौर में थे परन्तु पार्टी नेतृत्व ने फिर इनपर विश्वास जताया तथा इन्हे ही चुनाव मैदान में उतारा। इस बार भी राजद ने अपने अनुभवी और पूर्व राज्य मंत्री डॉ रामप्रकाश महतो को इनके विरुद्ध प्रत्याशी बनाया. पहले भाजपा समर्थकों को लग रहा था की इस बार तारकिशोर प्रसाद की जीत आसान होगी परन्तु डॉ रामप्रकाश महतो के मैदान में उतरते ही चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया. एक समय ऐसा भी लगा की चुनावी हवा का रुख राजद प्रत्यासी के पक्ष में जा रहा है. परन्तु परिणाम इसबार भी तारकिशोर प्रसाद के पक्ष में ही आया.
यह महज संयोग नहीं है बल्कि जनता ने इनके क्षेत्र के विकास के प्रति प्रयास एवं उपलब्धि तथा भलमनसाहत के कारण भरोसा जताया।
सीमांचल क्षेत्र में 2020 का चुनाव परिणाम कटिहार की जनता के लिए बहुत बड़ा सन्देश लेकर आया. लगातार चौथी बार विजयी होने के फलस्वरूप तारकिशोर प्रसाद का राजनीतिक कद बहुत बड़ा हो गया. भाजपा नेतृत्व को लगा की इन्हे सरकार में महत्वपूर्ण दायित्व प्रदान करने से न सिर्फ सीमांचल बल्कि पुरे प्रदेश में भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन प्रबल होगा.
अतः भारतीय जनता पार्टी ने इन्हे उप मुख्यमंत्री का दायित्व सौंपकर एक साधारण कार्यकर्ता से प्रदेश का नीति नियंता इस भरोसे पर बनाया है की राज्य के चहुंमुखी विकास में अपना सर्वोत्कृष्ट योगदान करेंगे.
अशोक चौधरी "प्रियदर्शी"
Ashok Kumar Choudhary is a retired banker who has wide experience in handling rural banking, agriculture and rural credit. He is also a Trade Unionist and has held a leadership position in Bharatiya Mazdoor Sangh, trade wing of RSS and formaly he has been the chairman of Regional Advisory Committe, DT National Board of Workers Education. He in past he hold the post of Joint State President of National Human Rights Organization.