श्यामा प्रसाद मुखर्जी: एक युगपुरुष
श्यामा प्रसाद मुखर्जी एक ऐसा नाम है जो भारतीय राजनीति और शिक्षा के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा गया है। उनका जीवन एक प्रेरणा का स्रोत है, जो हमें राष्ट्रवाद, शिक्षा और सामाजिक सेवा के महत्व को समझने के लिए प्रेरित करता है।
*प्रारंभिक जीवन और शिक्षा*
श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म 6 जुलाई 1901 को कलकत्ता में हुआ था। उनके पिता आशुतोष मुखर्जी एक प्रसिद्ध शिक्षाविद् और कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति थे। श्यामा प्रसाद ने अपनी शिक्षा प्रेसीडेंसी कॉलेज और कलकत्ता विश्वविद्यालय से प्राप्त की। उन्होंने कानून की पढ़ाई भी की और बैरिस्टर बनने के लिए इंग्लैंड गए।
*राजनीतिक करियर*
श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस पार्टी से की थी। वह 1929 में कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में बंगाल विधान परिषद के सदस्य चुने गए। बाद में उन्होंने कांग्रेस पार्टी छोड़ दी और हिंदू महासभा में शामिल हो गए। 1951 में उन्होंने भारतीय जनसंघ की स्थापना की और इसके पहले अध्यक्ष बने।
*विचारधारा*
श्यामा प्रसाद मुखर्जी की विचारधारा राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर आधारित थी। वह एक मजबूत राष्ट्रवादी थे और उनका मानना था कि भारत को एक मजबूत और एकीकृत राष्ट्र बनना चाहिए। उन्होंने जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 का विरोध किया और इसके खिलाफ लड़ाई लड़ी।
*कार्य*
श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने अपने जीवन में कई महत्वपूर्ण कार्य किए। उन्होंने भारतीय जनसंघ की स्थापना की और इसके माध्यम से राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को बढ़ावा दिया। उन्होंने जम्मू और कश्मीर के विशेष दर्जे का विरोध किया और इसके खिलाफ सत्याग्रह किया। उनका नारा “एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे” बहुत प्रसिद्ध हुआ।
*सामाजिक जीवन*
श्यामा प्रसाद मुखर्जी एक सामाजिक कार्यकर्ता भी थे। उन्होंने शिक्षा और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वह एक मजबूत राष्ट्रवादी थे और उनका मानना था कि शिक्षा और सामाजिक सेवा के माध्यम से ही राष्ट्र का निर्माण किया जा सकता है।
*राजनीतिक योगदान*
श्यामा प्रसाद मुखर्जी का राजनीतिक योगदान बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने भारतीय जनसंघ की स्थापना की और इसके माध्यम से राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को बढ़ावा दिया। उन्होंने जम्मू और कश्मीर के विशेष दर्जे का विरोध किया और इसके खिलाफ लड़ाई लड़ी।
*निष्कर्ष*
श्यामा प्रसाद मुखर्जी एक युगपुरुष थे जिन्होंने अपने जीवन में राष्ट्रवाद, शिक्षा और सामाजिक सेवा के महत्व को समझने के लिए प्रेरित किया। उनका जीवन एक प्रेरणा का स्रोत है जो हमें राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित करता है। हमें उनके आदर्शों और विचारों को अपनाने का प्रयास करना चाहिए और राष्ट्र के निर्माण में योगदान देना चाहिए।
*डॉ अशोक चौधरी “प्रियदर्शी”*
सीमालय, अमला टोला, कटिहार
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