*झारू कलाल: गुरु नानक देव जी के सेवक और बाणी के प्रथम लेखक*
*खंड 1: परिचय*
*झारू कलाल* सिख इतिहास की उन महान विभूतियों में गिने जाते हैं, जिन्होंने गुरु नानक देव जी के साथ उनके आरंभिक जीवन में संगत की और उनकी वाणी को लिपिबद्ध कर संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह उन प्रारंभिक अनुयायियों में से एक थे जो गुरु के उपदेशों को न केवल आत्मसात करते थे बल्कि उन्हें लिखकर आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने का कार्य भी करते थे।
*खंड 2: गुरु नानक देव जी के साथ संपर्क*
इतिहास में वर्णन है कि जब गुरु नानक देव जी को सैदपुर में बंदी बनाया गया था, उस समय झारू कलाल भी वहीं कारावास में थे। उसी दौरान उन्होंने गुरु नानक जी की वाणी को पहली बार लिखित रूप में उतारा। पुरातन जनमसाखी (1588 ई.) की साखी संख्या 35 में लिखा है कि उस समय झारू कलाल कारागार में थे और उन्होंने गुरु की वाणी को लिखित रूप में संजोया।
*खंड 3: झारू कलाल की सेवा और योगदान*
झारू कलाल ने गुरु नानक जी की वाणियों जैसे ‘माझ दी वार’, ‘सिद्ध गोष्ठी’ और अन्य उपदेशों को लिखकर संरक्षित किया। यह कार्य उस काल में अत्यंत महत्वपूर्ण था जब ज़्यादातर ज्ञान मौखिक परंपरा में चलता था। झारू कलाल की लेखनी और निष्ठा ने उस ज्योति को अक्षुण्ण बनाए रखा, जो आज श्री गुरु ग्रंथ साहिब के रूप में करोड़ों लोगों के जीवन का पथप्रदर्शक है।
*खंड 4: कलाल जाति का सिख समुदाय के विकास में योगदान*
*कलाल जाति* ने सिख इतिहास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इस जाति के लोगों ने सिख गुरुओं के साथ मिलकर सिख धर्म के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। *सरदार जस्सा सिंह आहलुवालिया* एक महत्वपूर्ण व्यक्ति थे जिन्होंने सिख इतिहास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वह कलाल जाति से ताल्लुक रखते थे और उनकी सेवाएं सिख धर्म के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। कलाल जाति का सिख समुदाय के विकास में योगदान बहुत महत्वपूर्ण है और उनकी सेवाएं आज भी याद रखी जाती हैं।
*खंड 5: निष्कर्ष*
झारू कलाल न केवल एक भक्त थे, बल्कि एक लेखक, सेवक और गुरु परम्परा के संवाहक भी थे। उनकी सेवाएं और योगदान सिख इतिहास में बहुत महत्वपूर्ण हैं और आज भी याद रखी जाती हैं। कलाल जाति का महत्व और योगदान सिख समुदाय के विकास में बहुत महत्वपूर्ण है। इस जाति का संबंध भगवान सहस्त्रार्जुन से है। जो एक महत्वपूर्ण देवता हैं। भगवान सहस्त्रार्जुन की कथा पौराणिक ग्रंथों में बहुत महत्वपूर्ण है और कलाल जाति का संबंध उनके साथ होने से इस जाति का महत्व और भी बढ़ जाता है। झारू कलाल और कलाल जाति का नाम सिख इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा गया है और उनकी सेवाएं सिख धर्म के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
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*अशोक चौधरी प्रियदर्शी_*✍️
इतिहास, राजनीति, अर्थशास्त्र, ज्योतिष, समसामयिक विषयों के लेखक, विचारक
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