🌞 श्रीपद येस्सो नायक :

🌞 “ साधारण से असाधारण बनने की प्रेरक गाथा” 🌞

अध्याय 1 : जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि

श्रीपद येस्सो नायक का जन्म 4 अक्टूबर 1952 को गोवा राज्य के उत्तरी गोवा जिले के आदपई (Adpai) गाँव में हुआ।

पिता : श्री येस्सो भिकारी नायक
माता : श्रीमती जयंश्री नायक

वे एक साधारण परिवार में जन्मे, लेकिन अपनी मेहनत, लगन और ईमानदारी के बल पर राष्ट्रीय राजनीति के शीर्ष तक पहुँचे।

अध्याय 2 : शिक्षा और प्रारम्भिक संस्कार

उनकी प्रारम्भिक शिक्षा गोवा में हुई। आगे चलकर उन्होंने मुंबई विश्वविद्यालय से कला स्नातक (B.A.) की डिग्री प्राप्त की।
छात्र जीवन से ही संगठन क्षमता, सामाजिक चेतना और राष्ट्रभक्ति का भाव उनके भीतर गहराई से स्थापित हो गया था।

अध्याय 3 : वैवाहिक जीवन और परिवार

3 मई 1984 को उनका विवाह श्रीमती विजया श्रीपद नायक के साथ हुआ।
उनका परिवार सुखी और समृद्ध था, जिसमें तीन संतानें हैं।
जनवरी 2021 की सड़क दुर्घटना में पत्नी विजया जी का निधन हुआ, जो श्रीपद जी के जीवन की सबसे बड़ी व्यक्तिगत त्रासदी रही।

अध्याय 4 : राजनीति की शुरुआत

1983 में उन्होंने दुर्भाट ग्राम पंचायत से सार्वजनिक जीवन का आरंभ किया।
इसके बाद भाजपा (BJP) से जुड़कर गोवा में पार्टी की जड़ें मजबूत कीं।
1999 में पहली बार वे उत्तर गोवा से लोकसभा सांसद बने। इसके बाद लगातार कई बार जनता ने उन्हें अपना प्रतिनिधि चुना।

अध्याय 5 : संसदीय जीवन और केंद्रीय मंत्री पद

श्रीपद नायक अब तक पाँच से अधिक बार उत्तर गोवा से सांसद निर्वाचित हो चुके हैं।
केंद्र सरकार में उन्होंने अनेक महत्त्वपूर्ण पदों पर कार्य किया, जैसे—

  1. पर्यटन व संस्कृति मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)
  2. आयुष मंत्रालय (स्वतंत्र प्रभार)
  3. रक्षा राज्य मंत्री
  4. पर्यटन व बंदरगाह मंत्रालय में राज्य मंत्री
  5. 2024 से : बिजली व नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय में राज्य मंत्री

अध्याय 6 : उल्लेखनीय योगदान

  1. पर्यटन विकास – गोवा और भारत को पर्यटन क्षेत्र में नई ऊँचाई दिलाई।
  2. आयुष मंत्रालय – योग और भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को वैश्विक पहचान दिलाई।
  3. रक्षा योगदान – सैनिक कल्याण और राष्ट्रीय सुरक्षा पर कार्य।
  4. सामाजिक सेवा – शिक्षा, स्वास्थ्य और सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण।

अध्याय 7 : चुनौतियाँ

जनवरी 2021 की सड़क दुर्घटना उनके जीवन की सबसे कठिन घड़ी थी।
पत्नी और निजी सचिव का निधन हो गया तथा स्वयं भी गंभीर रूप से घायल हुए।
इसके बावजूद उन्होंने राजनीति और जनसेवा का मार्ग जारी रखा।
साहस और धैर्य उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी शक्ति है।

अध्याय 8 : समाज और संस्कृति से जुड़ाव

वे सदैव गोवा की संस्कृति, भाषा और परंपराओं से जुड़े रहे।
जनता से सीधा संवाद और समस्याओं का त्वरित समाधान उनकी कार्यशैली की विशेषता है।
सादगी और सरलता उनकी पहचान है।

अध्याय 9 : जायसवाल / कलवार समाज का राष्ट्रीय गौरव

श्रीपद येस्सो नायक का सबसे बड़ा परिचय यह है कि वे जायसवाल / कलवार समाज के राष्ट्रीय गौरव हैं।
यह समाज परिश्रम, व्यावसायिक नैतिकता, सामाजिक एकता और राष्ट्रभक्ति के लिए प्रसिद्ध है।
श्रीपद नायक का राजनीति की ऊँचाइयों तक पहुँचना इस समाज की शक्ति, सामर्थ्य और नेतृत्व क्षमता का प्रमाण है।

वे इस बात के प्रतीक हैं कि जायसवाल समाज केवल व्यापार और आर्थिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय नेतृत्व की अग्रिम पंक्ति में भी सम्मानित स्थान रखता है।
उनकी सफलता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है और पूरे जायसवाल / कलवार समाज का स्वाभिमान है।

✍️ निष्कर्ष

श्रीपद येस्सो नायक का जीवन संघर्ष, सेवा और समर्पण का जीवंत उदाहरण है।
एक साधारण परिवार से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति में ऊँचाइयों तक पहुँचना, बार-बार जनता का विश्वास अर्जित करना और समाज व संस्कृति की सेवा करना उन्हें विशिष्ट बनाता है।
वे न केवल गोवा की शान और भारतीय राजनीति के समर्पित जननेता हैं, बल्कि पूरे जायसवाल / कलवार समाज के राष्ट्रीय गौरव भी हैं।


✍️ संकलन व लेखन : © अशोक चौधरी ‘प्रियदर्शी’
(ज्योतिष-हस्तरेखा, इतिहास, राजनीति, समसामयिक विषयों के लेखक, विचारक एवं सामाजिक चिंतक)
📧 kautilya.astro@gmail.com
📍 कटिहार, बिहार
☎️ 9431229143


 

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