PRASHANT KUMAR GHOSH

डंटी टुटा कप


एक हास्यकर सत्य घटना बताने जा रहा हूँ।1989 साल की बात है।उस समय मैं मधेपुरा जिला के खुरहान शाखा में शाखा प्रबंधक के पद पर पदस्थापित था।खुरहान शाखा के मकान मालिक पूर्णिया में रहा करते थे।लेकिन उनके बड़े भाई श्री सुरेश कुमार सिंह,जो खुरहान कॉलेज के प्रिंसिपल थे,शाखा परिसर के बगल में ही उनका आलीशान दो मंजिला मकान था।उसी माकन के ग्राउंड फ्लोर के बाहरी हिस्से में बने एक कमरे को शाखा प्रबंधकों के लिए free में रहने के लिए दिया करते थे।मै भी उनके द्वारा दिए गए कमरे में रहा करता था।हमलोग शाम को प्रिंसिपल साहब के बरामदे पर बैठकर चाय पीते थे और गपसप भी करते थे।चाय प्रिंसिपल साहब के घर से ही आता था।वैसे चाय का व्यवस्था हमलोग खुद भी रखते थे।शाखा का मेसेंजर श्री लक्ष्मी पासवान था।वही चाय बनाता था।खुरहान बाजार में एक छोटा मोटा खाने का होटल था,वही से हमलोगों का खाना आता था।
खुरहान का प्रखंड आलमनगर था।प्रखंड का खाता भी हमारे शाखा में था।प्रिंसिपल साहब से BDO साहब का भी अच्छा Term था।BDO साहब कभी कभार बैंक या प्रिंसिपल साहब से भेंट करने/गपसप करने उनके आवास पर बैठते थे।उस समय हमलोग भी प्रिंसिपल साहब के दरवाजे पर ही बैठकर चाय नास्ता करते थे और गपसप भी करते थे।प्रिंसिपल साहब हमलोगों की ऒर से deposit देने के लिए भी BDO साहब से पैरबी भी करते थे।हमलोगों के लिए प्रिंसिपल साहब अभिभावक की तरह थे। एक दिन की बात है,प्रिंसिपल साहब उस दिन खुरहान में नहीं थे।BDO साहब पशुपालन पदाधिकारी के साथ बैंक पहुँच गए।बैंक से उनके खाता के बारे में कुछ जानकारी लेना था और प्रिंसिपल साहब से भी गपसप करना था।BDO साहब को प्रिंसिपल साहब के दरबाजे पर लगे कुर्सी पर बैठाया और बातचीत करने लगे।प्रिंसिपल साहब नहीं थे इसलिए उनके यहां से चाय आना नहीं था,इसलिए मैं अपना मेसेंजर लक्ष्मी पासवान को चाय बनाकर लाने को कहा।कुछ देर में लक्ष्मी पासवान ने तीन कप में चाय बनाकर लाया।मैंने देखा की तीन कप में से दो कप का डंटी टुटा हुआ है और एक कप सही सलामत है।पासवान ने सही कप को मुझे थमा दिया और डंटी टुटा कप को बीडीओ साहब और पशुपालन पदाधिकारी को दे दिया।यह देखकर शर्म से मेरा सिर कटा जा रहा था।मन में गुस्सा भी आ रहा था कि अगर कप सही नहीं था तो प्रिंसिपल साहब के घर से ले आता, ऐसा क्यूँ नहीं किया?फिर मैं ऐसा गलती को कुछ सुधारने के लिए मैं जल्द BDO साहब से डंटी टुटा कप लेकर अपना सही कप को उनको देना चाहा। BDO साहब मना कर रहे थे की क्या होगा रहने दीजिए न।मैंने फिर भी जबरदस्ती उनसे डंटी टुटा कप लेकर उन्हें अच्छा कप थमाया।यह सब कांड लक्ष्मी पासवान खड़ा होकर देख रहा था कि कैसे बीडीओ साहब से मै डंटी टुटा कप छीन लिया।चाय पीने के बाद बीडीओ साहब लोग चले गए।
दूसरे दिन करीब एक बजे लक्ष्मी पासवान को चाय बनाकर पिलाने को कहा।कुछ देर में वह एक डंटी टुटा कप में चाय बनाकर ले आया।यह देखकर मुझे बहुत गुस्सा आया और बिगड़ते हुए बोला क्या लक्ष्मीजी एक जो अच्छा कप था उसका भी डंटी तोर दिए क्या? लक्ष्मी बोला नहीं सर वह कप तो ठीक ही है। आपको तो डंटी टुटा हुआ कप ही अच्छा लगता है न इसलिए आपको डंटी टुटा कप में चाय दिया,क्योंकि कल देखा कि आप जबरदस्ती बीडीओ साहब से डंटी टुटा कप लेकर डंटी बाला कप थमाया था।इसलिए सोचा कि आपको डंटी टुटा कप ही अच्छा लगता होगा,तभी न ऐसा किया

लक्ष्मी पासवान का जवाब सुनकर मैं हसूं या अपना केश नोचु समझ में नहीं आ रहा था।

प्रशांत कुमार घोष,मधेपुरा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *