“आंदोलनजीवी” को क्यों है इतनी बौखलाहट- मोदी के कहने मात्र से : अशोक चौधरी

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मोदी का ब्रह्मास्त्र… ‘आंदोलनजीवी’

गीता में शब्द को ब्रह्म कहा गया है और राजनीति में यही शब्द ब्रह्मास्त्र बन जाते हैं.

पूरे देश में एक शब्द आजकल काफी चर्चा में है.. आंदोलनजीवी

इस शब्द का इस्तेमाल संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा किया गया है.

इस शब्द ने किसान आंदोलन करने वाले कम्युनिस्ट और कथित किसान नेताओं पर ब्रह्मास्त्र के जैसा असर किया है.

ना सिर्फ ये कथित किसान नेता बल्कि आंदोलन का समर्थन करने वाले तमाम लोग भी इस शब्द के प्रहार से तड़प उठे हैं.

लोग तिलमिलाए हुए हैं… और ये तिलमिलाहट बताती है कि शब्द ब्रह्मास्त्र की तरह कैसे असर करता है.

श्रीमदभगवतगीता के सांतवे अध्याय के आठवें श्लोक का हिस्सा है.. . शब्दः खे अर्थात आकाश में मैं शब्द हूँ

पूरा श्लोक इस तरह से है…

रसोऽहमप्सु कौन्तेय प्रभास्मि शशिसूर्ययोः ⁠।
प्रणवः सर्ववेदेषु शब्दः खे पौरुषं नृषु ⁠।⁠।

अर्थ- हे अर्जुन ! मैं जल में रस हूँ, चन्द्रमा और सूर्य में प्रकाश हूँ, सम्पूर्ण वेदों में ओंकार हूँ, आकाश में शब्द और पुरुषों में पुरुषत्व हूँ ⁠।⁠।⁠

भगवान श्री कृष्ण ने खुद यानी ब्रह्म की तुलना शब्द से की है… इसीलिए शब्द को ब्रह्म कहा जाता है.

आंदोलनजीवी शब्द के मूल में परजीवी शब्द है.. इसमें पर को आंदोलन से रीप्लेस कर दिया गया है.

परजीवी (पैरासाइट) एक तरह का सूक्ष्म कीटाणु होता है जो किसी बड़े जीव जैसे गाय या भैंस के पीठ पर चिपक कर जिंदगी भर उसका खून चूसता रहता है. ठीक इसी तरह आंदोलनजीवी भी पूरी जिंदगी आंदोलन पर जीता है…. आंदोलन का इस्तेमाल वो अपना जीवन चलाने के लिए करता है. ऐसा ही इस शब्द का भाव है. और यही वजह है कि इस शब्द… आंदोलनजीवी ने मोदी विरोधियों पर परमाणु अस्त्र जैसा असर किया है.

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