Author: अशोक चौधरी "प्रियदर्शी"

building, structure, gallery

जिंदगी भर प्रयास ही प्रयास

प्रयास अँधेरे कमरे में बिछावन पर लेटे हुए सिरहाने पर सर रख सोनेका प्रयासदिन भर हुई मुलाकातों मेंछुपे प्रश्नो को ढूंढने का प्रयासहर परीक्षा में टॉप करने का प्रयासहार कर सब कुछ जीता हुआ दिखाने का प्रयासबड़ा घर बड़ी गाड़ी का प्रयासबड़ा बैंक बैलेंस बनाने का प्रयासजमीन छोड़ आसमान में उड़ जाने का प्रयासहमेशा दूसरों…

बड़े घर की बेटी: मुंशी प्रेम चंद की कहानी

बड़े घर की बेटी बेनीमाधव सिंह गौरीपुर गाँव के जमींदार और नम्बरदार थे। उनके पितामह किसी समय बड़े धन-धान्य संपन्न थे। गाँव का पक्का तालाब और मंदिर जिनकी अब मरम्मत भी मुश्किल थी, उन्हीं के कीर्ति-स्तंभ थे। कहते हैं इस दरवाजे पर हाथी झूमता था, अब उसकी जगह एक बूढ़ी भैंस थी, जिसके शरीर में…

चमत्कार: मुंशी प्रेमचन्द की कहानी

लालच आदमी को क्या से क्या बना देता है मुंशी प्रेमचन्द की कहानी “चमत्कार “ बी.ए. पास करने के बाद चन्द्रप्रकाश को एक टयूशन करने के सिवा और कुछ न सूझा। उसकी माता पहले ही मर चुकी थी, इसी साल पिता का भी देहान्त हो गया और प्रकाश जीवन के जो मधुर स्वप्न देखा करता…

कफ़न: मुंशी प्रेम चंद की कहानी

कफ़न   झोपड़े के द्वार पर बाप और बेटा दोनों एक बुझे हुए अलाव के सामने चुपचाप बैठे हुए हैं और अन्दर बेटे की जवान बीबी बुधिया प्रसव-वेदना में पछाड़ खा रही थी। रह-रहकर उसके मुँह से ऐसी दिल हिला देने वाली आवाज़ निकलती थी, कि दोनों कलेजा थाम लेते थे। जाड़ों की रात थी,…

विध्वंस: मुंशी प्रेम चंद की कहानी

विध्वंस जिला बनारस में बीरा नाम का एक गाँव है। वहाँ एक विधवा वृद्धा, संतानहीन, गोंड़िन रहती थी, जिसका भुनगी नाम था। उसके पास एक धुर भी जमीन न थी और न रहने का घर ही था। उसके जीवन का सहारा केवल एक भाड़ था। गाँव के लोग प्रायः एक बेला चबैना या सत्तू पर…

दूध का दाम: मुंशी प्रेमचंद की कहानी

 दूध का दाम अब बड़े-बड़े शहरों में दाइयाँ, नर्सें और लेडी डाक्टर, सभी पैदा हो गयी हैं; लेकिन देहातों में जच्चेखानों पर अभी तक भंगिनों का ही प्रभुत्व है और निकट भविष्य में इसमें कोई तब्दीली होने की आशा नहीं। बाबू महेशनाथ अपने गाँव के जमींदार थे, शिक्षित थे और जच्चेखानों में सुधार की आवश्यकता…