Category: Poem

हां मैं बिहार हूं- बिहार दिवस की शुभकाभना

*बिहार हूँ मैं* चाणक्य की नीति हूँ… आर्यभट्ट का आविष्कार हूँ… महावीर की तपस्या हूँ मैं… बुद्ध का अवतार हूँ… *हाँ..! मैं बिहार हूँ।* सीता की भूमि हूँ… विद्यापति का संसार हूँ… जनक की नगरी हूँ मैं… माँ गंगा का श्रृंगार हूँ… *हाँ..! मैं बिहार हूँ।* चंद्रगुप्त का साहस हूँ… अशोक की तलवार हूँ… बिंदुसार…

‘राहुल गाँधी शादी करें… वो भी दलित लड़की से, महात्मा गाँधी का सपना पूरा करें’ – रामदास अठावले

रिपब्लिक पार्टी ऑफ इंडिया (RPI) चीफ व केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले अक्सर सदन में अपने मजाकिया अंदाज के कारण चर्चा में रहते हैं। अब अठावले ने राहुल गाँधी को ‘हम दो-हमारे दो’ पर सुझाव दिया है। साथ ही अठावले ने अपने इस सुझाव के साथ राहुल गाँधी को महात्मा गाँधी का ‘सपना’ पूरा करने की…

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मौन ही है साक्षी

” मौन “मौन ही है साक्षीप्रत्येक उस बूँद का ,जो निशा के आवरण में चुपचाप बिखर गया ।मौन पहचानता हैप्रत्येक उस स्वप्न को ,जो यथार्थ के प्रहार से चुपचाप दरक गया ।मौन ने ही तो…पिया थाविवशता में तिरिस्कार को ,जिसके बाद आदमी स्वयं में ही मर गयामौन हैं जो स्त्रियाँतो ही पुरुष बोलतापर स्त्रियों के…

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मौन तुम्हारा इतना मादक

मौन तुम्हारा मौन तुम्हारा इतना मादक,जब बोलोगे तब क्या होगा ? नयन तुम्हारे इतने भावुक,जब देखोगे तब क्या होगा ?जब से तेरा नाम लिया है,. वाणी मेरी ऋचा बन गयी. जब से सुन ली कथा तुम्हारी,वंशी मेरी व्यथा बन गयी.चित्र तुम्हारा इतना मोहक, जब आजोगे तब क्या होगा ?मौन तुम्हारा इतना मादक, जब बोलोगे तब…

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पचास पार सखियों के लिए

  अंटी उम्र पचास पार है लेकिनशक्ल हमारी पच्चीस के जैसी।मुझको अंटी कहने वालो,तुम्हारी ऐसी की तैसी।।। बेटे के कॉलेज गयी तो,टीचर देख मुझे मुस्कुराई।।।बोली क्या मेनटेनड हो MISS ?मम्मी हो,पर लगते हो SIS।। नीयत मेरी साफ़ है सखियो,,नही हरकतें ऐसी वैसी।मुझको अंंटी कहने वालों,तुम्हारी ऐसी की तैसी।।।। कितनी जंग लड़ी और जीती,इन गुज़रे सालों…

हम सब रिटायर हो गए हैं

हम सब रिटायर हो गए हैँअपने आफिसों से बाहर हो गए हैँकल तक आफिस में अपने कामों की डींगे हांकते थेथोड़े को बडा चडा कर बखानते थेअभी कल की ही बात लगती हैबस ये पिछली ही रात लगती हैजब ज्वाइन किया था हम सबनेएक सपने की सौगात लगती है कैसे ये दिन हैँ गुजर गयेहम…

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आओ जियें जिन्दगी बन्दगी के लिए

पता नहीं किस बात पर इतराता है आदमीकब समझेगा अर्थ ढाई आखर का आदमीभूल बैठा है आज वो निज कर्तव्य को खून क्यों मानव का बहाता है आदमी क्यों शब्दों के बाण सेऔरों का दिल दुखाता है आदमी“जियो और जीने दो “कब समझेगा ये आदमीखुद से क्या भगवान से है बेखबरआज आस्था के मंदिर गिराता…

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आत्मावलोकन

      मैंने ईश्वर से शक्ति माँगी थी, ताकि मैं कुछ प्राप्त कर सकूँ उसने मुझे कमजोर बनाया, ताकि मैं दूसरों की सेवा कर सकूँ मैंने सेहत माँगी थी, ताकि मैं बड़े काम कर सकूँ, मुझे दुर्बलता मिली, ताकि मैं अच्छे काम कर सकूँ. मैंने धन दौलत माँगी थी, ताकि मैं खुश रह सकूँ,…

मैं अपने गाँव जाना चाहती हूँ

मैं अपने गाँव जाना चाहती हूँ मैं अपने गाँव जाना चाहती हूँ। जाड़े की नरम धूप और वे छत का सजीदा कोना, नरम-नरम किस्से मूंगफली के दाने और गुदगुदा बिछौना मैं अपने गाँव जाना चाहती हूँ। घूप के साथ खिसकती खटिया, किस्सों की चादर व सपनों की तकिया मैं अपने गाँव जाना चाहती हूँ। दोस्तों…