Category: Literature

एक जुराब की आत्मकथा: __विजयकान्त द्विवेदी

एक जुराब की आत्मकथा ————————————— मैं एक फटा हुआ जुराब, मोजा, या साक्स हूं।नित्य पैरों से रौंदा खाकर मेरी यह स्थिति है कि मैं आज अच्छे समाज में नहीं जा सकता। संभव है कि कुछ दिनों के बाद मैं कचरे के ढेर में चला जाऊं। फिर धूल मिट्टी में मिलकर अपना अस्तित्व खो दूं। मेरे…

स्त्री-पुरुष का पारस्परिक वार्तालाप कैसे हो

बातचीत कैसे करें ? स्त्री-पुरुष का पारस्परिक वार्तालाप कैसे हो, किस विषय पर और कब हो, उन दोनों को अपने सम्बन्धियों से किस ढंग से वार्तालाप करना चाहिए. पड़ोसी से अथवा किसी अपरिचित, से किस प्रकार बातें करनी चाहिए यह विषय बहुत गम्भीर है। वार्तालाप की छोटी-सी भूल का परिणाम बड़ा भयंकर होता है ।…

स्त्री तरणी है तथा पुरुष पतवार

अनुभव आधारित सुखमय गृहस्थ जीवन के सूत्र संसार में बिना स्त्री के मनुष्य का जीवन नीरस और बिना पुरुष के स्त्री का संसार व्यर्थ है। बिना स्त्री-पुरुष के परस्पर सहयोग के इस संसार का चलना भी असम्भव है, इसे भी कोई अस्वीकार न करेगा। यदि स्त्री तरणी है तो पुरुष पतवार है। यदि स्त्री नदी…

बड़े घर की बेटी: मुंशी प्रेम चंद की कहानी

बड़े घर की बेटी बेनीमाधव सिंह गौरीपुर गाँव के जमींदार और नम्बरदार थे। उनके पितामह किसी समय बड़े धन-धान्य संपन्न थे। गाँव का पक्का तालाब और मंदिर जिनकी अब मरम्मत भी मुश्किल थी, उन्हीं के कीर्ति-स्तंभ थे। कहते हैं इस दरवाजे पर हाथी झूमता था, अब उसकी जगह एक बूढ़ी भैंस थी, जिसके शरीर में…

चमत्कार: मुंशी प्रेमचन्द की कहानी

लालच आदमी को क्या से क्या बना देता है मुंशी प्रेमचन्द की कहानी “चमत्कार “ बी.ए. पास करने के बाद चन्द्रप्रकाश को एक टयूशन करने के सिवा और कुछ न सूझा। उसकी माता पहले ही मर चुकी थी, इसी साल पिता का भी देहान्त हो गया और प्रकाश जीवन के जो मधुर स्वप्न देखा करता…

कफ़न: मुंशी प्रेम चंद की कहानी

कफ़न   झोपड़े के द्वार पर बाप और बेटा दोनों एक बुझे हुए अलाव के सामने चुपचाप बैठे हुए हैं और अन्दर बेटे की जवान बीबी बुधिया प्रसव-वेदना में पछाड़ खा रही थी। रह-रहकर उसके मुँह से ऐसी दिल हिला देने वाली आवाज़ निकलती थी, कि दोनों कलेजा थाम लेते थे। जाड़ों की रात थी,…

विध्वंस: मुंशी प्रेम चंद की कहानी

विध्वंस जिला बनारस में बीरा नाम का एक गाँव है। वहाँ एक विधवा वृद्धा, संतानहीन, गोंड़िन रहती थी, जिसका भुनगी नाम था। उसके पास एक धुर भी जमीन न थी और न रहने का घर ही था। उसके जीवन का सहारा केवल एक भाड़ था। गाँव के लोग प्रायः एक बेला चबैना या सत्तू पर…

दूध का दाम: मुंशी प्रेमचंद की कहानी

 दूध का दाम अब बड़े-बड़े शहरों में दाइयाँ, नर्सें और लेडी डाक्टर, सभी पैदा हो गयी हैं; लेकिन देहातों में जच्चेखानों पर अभी तक भंगिनों का ही प्रभुत्व है और निकट भविष्य में इसमें कोई तब्दीली होने की आशा नहीं। बाबू महेशनाथ अपने गाँव के जमींदार थे, शिक्षित थे और जच्चेखानों में सुधार की आवश्यकता…