Category: Literature

मुंशी प्रेमचंद की कहानी: पंच परमेश्वर

पंच परमेश्वर   जुम्मन शेख अलगू चौधरी में गाढ़ी मित्रता थी। साझे में खेती होती थी। कुछ लेन-देन में भी साझा था। एक को दूसरे पर अटल विश्वास था। जुम्मन जब हज करने गये थे, तब अपना घर अलगू को सौंप गये थे, और अलगू जब कभी बाहर जाते, तो जुम्मन पर अपना घर छोड़…

दो बैलों की कथा : मुंशी प्रेमचंद

दो बैलों की कथा जानवरों में गधा सबसे ज्यादा बुद्धिमान समझा जाता है। हम जब किसी आदमी को पहले दर्जे का बेवकूफ कहना चाहते हैं, तो उसे गधा कहते हैं। गधा सचमुच बेवकूफ है या उसके सीधेपन, उसकी निरापद सहिष्णुता ने उसे यह पदवी दे दी है, इसका निश्चय नहीं किया जा सकता। गायें सींग…

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कहानी: आज ही क्यों नहीं

आज ही क्यों नहीं ?  एक बार की बात है कि एक शिष्य अपने गुरु का बहुत आदर-सम्मान किया करता था |गुरु भी अपने इस शिष्य से बहुत स्नेह करते थे लेकिन  वह शिष्य अपने अध्ययन के प्रति आलसी और स्वभाव से दीर्घसूत्री था |सदा स्वाध्याय से दूर भागने की कोशिश  करता तथा आज के काम को कल…

यह भी कट जाएगा

प्रेरणा का स्रोत दोस्तों ,जिंदगी है तो संघर्ष हैं,तनाव है,काम का pressure है, ख़ुशी है,डर है !लेकिन अच्छी बात यह है कि ये सभी स्थायी नहीं हैं!समय रूपी नदी के प्रवाह में से सब प्रवाहमान हैं!कोई भी परिस्थिति चाहे ख़ुशी की हो या ग़म की, कभी स्थाई नहीं होती ,समय के अविरल प्रवाह में विलीन हो जाती…

माँ का पल्लू ….

माँ का पल्लू …. मुझे नहीं लगता कि आज के बच्चे यह जानते हो कि पल्लू क्या होता है, इसका कारण यह है कि आजकल की माताएं अब साड़ी नहीं पहनती हैं। पल्लू बीते समय की बातें हो चुकी है। माँ के पल्लू का सिद्धांत माँ को गरिमा मयी छवि प्रदान प्रदान करने के लिए…

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कहानी “निवाला”

निवाला बड़ी बेचैनी से रात कटी।बमुश्किल सुबह एक रोटी खाकर, घर से अपने शोरूम के लिए निकला।आज किसी के पेट पर पहली बार लात मारने जा रहा हूँ।ये बात अंदर ही अंदर कचोट रही है।ज़िंदगी में यही फ़लसफ़ा रहा मेरा कि, अपने आस पास किसी को, रोटी के लिए तरसना ना पड़े,पर इस विकट काल…