हे माधव गोविन्द मुरारी: राजीव जायसवाल
हे माधव गोविंद मुरारी तुझ बिन कवन सहाय । तू मेरे ह्रदय का धड़क धड़कना तू मेरी श्वास चलाय । तू मेरे अंतर अनहद बाजे जीवन ज्योति जलाए नव माहा माँ गरभ में राखे अमृत पान कराए । तू मेरे रक्त में रक्त बन बहे उदर की क्षुधा मिटाए रात नींद में स्वप्न दिखाए दिवस…








