क्रिप्टो करेंसी से एशिया की अर्थव्यवस्था पर खतरा बढ़ा, निवेशकों के हित के लिए कदम उठाना आवश्यक
यही बात रिजर्व बैंक ने अपनी स्टेबिलिटी रिपोर्ट में भी कही थी. इस ब्लॉग में एशियाई देशों में भारत में बढ़ते निवेश की भी बात कही गई है.
कुछ समय पहले फाइनेंशियल स्टेबिलिटी रिपोर्ट में रिजर्व बैंक के द्वारा जताई गई आशंकाओं पर अब आईएमएफ ने भी मुहर लगा दी है. आईएमएफ ने एशिया खासतौर पर भारत और ताइवान जैसे देशों में क्रिप्टो में बढ़ते निवेश पर चिंता जताते हुए इस पर कदम उठाने की बात कही है जिससे निवेशकों के हितों को सुरक्षित रखा जा सके. आईएमएफ के एक ब्लॉग में चेतावनी दी गई है कि क्रिप्टो एसेट्स फाइनेंशियल स्टेबिलिटी के लिए खतरा बन सकते हैं.
क्या है ब्लॉग में खास
रिपोर्ट में कहा गया है भुगतान के डिजिटल होने से फाइनेंशियल इंक्लूजन बढ़ा है. वहीं क्रिप्टो का बढ़ता चलन पूरे सिस्टम के लिए खतरा भी बन गया है. आईएमएफ के ब्लॉग में कहा गया है कि भारत से लेकर वियतनाम और थाइलैंड में क्रिप्टों का चलन तेजी से बढ़ा है और वो क्षेत्रीय फाइनेंशियल सिस्टम पर असर डालने की स्थिति तक पहुंच सकता है. ब्लॉग में कहा गया कि महामारी से पहले क्रिप्टो और देशों के फाइनेंशियल सिस्टम एक दूसरे से अलग थे और एशिया के इक्विटी मार्केट के साथ इनका कोई सीधा संबंध नहीं देखने को मिलता था. जिस वजह से ये सोचने की कोई वजह नहीं थी कि क्रिप्टो से फाइनेंशिल स्टेबिलिटी पर असर पड़ेगा.
हालांकि लॉकडाउन के दौरान लोगों ने अतिरिक्त आय के लिए डिजिटल रूट्स का सहारा लिया और क्रिप्टो के निवेश में तेज उछाल देखने को मिला. इस दौरान निचली ब्याज दरें और आसानी से उपलब्ध कर्ज से भी इसमें तेजी दर्ज हुई. सिर्फ एक साल में क्रिप्टो कारोबार 20 गुना बढ़ गया. हालांकि केंद्रीय बैंकों के द्वारा दरें बढ़ाने के साथ ही तेजी से स्थितियां बदली जिससे क्रिप्टो निवेशकों को तगड़ा नुकसान होने लगा इसकी वजह से उन्हें अपने पोर्टफोलियो में बदलाव करने पड़े जिससे बाजारो में गिरावट से लेकर पारंपरिक देनदारियों में डिफॉल्ट के मामले भी दर्ज हुए.
ब्लॉग के मुताबिक जैसे जैसे एशियाई देशो में क्रिप्टो का चलने बढ़ा, क्षेत्रीय इक्विटी मार्केट और क्रिप्टो एसेट्स के बीच संबंध और साफ होकर उभरा है. 2020 के बाद इस असर में लगातार बढ़त देखने को मिल रही है. इससे आशंका बन गई है कि एक बाजार का झटका अब दूसरे बाजार तक पहुंच सकता है इसलिए देशों को अब निवेशकों के हितों को बचाने के लिए क्रिप्टो को लेकर फ्रेमवर्क बनाने की जरूरत है.
क्रिप्टो में नुकसान बढ़ा
क्रिप्टो करंसी में तेज नुकसान देखने को मिल रहा है. बीते एक हफ्ते में ही बिटक्वाइन सहित कई क्रिप्टों में 10 प्रतिशत से ज्यादा का नुकसान देखने को मिला है. वहीं हाल ही में एक दिन में ही बिटक्वाइन 7 प्रतिशत से ज्यादा लुढ़की थी. ऐसे में बिटक्वाइन में तेज उतार-चढ़ाव बना हुआ है और कई निवेशकों को ऊंचे नुकसान उठाने पड़ रहे हैं. इसे देखते हुए ही आईएमएफ ने एक फ्रेमवर्क बनाने की वकालत की है.
सोर्स: TV 9