🌸 स्मृति-दीप

✍️ कलचुरी रत्न रायबहादुर डॉ. हीरालाल

🌿 जन्म एवं शिक्षा

जन्म : 1 अक्टूबर 1867, कटनी (मध्यप्रदेश)

समाज : कलवार / कलाल समाज

वंश परंपरा : कलचुरी वंशीय परंपरा से संबद्ध

कटनी की पावन भूमि पर जन्मे यह प्रतिभाशाली बालक बचपन से ही अध्ययनशील और कर्मनिष्ठ स्वभाव का धनी था। 1888 में गवर्नमेंट कॉलेज, जबलपुर से विज्ञान स्नातक (B.Sc.) की उपाधि प्राप्त की। बचपन में ही उनमें एक ऐसा संस्कार था जो उन्हें बहुआयामी विद्वान और कर्मठ प्रशासक के रूप में स्थापित करता चला गया।

🌺 कलवार/कलाल समाज की परंपरा

कलवार/कलाल समाज भारत के प्राचीनतम व्यवसायिक एवं सांस्कृतिक समाजों में से एक है।

यह समाज मूलतः व्यापार और उद्योग से जुड़ा रहा, साथ ही शिक्षा, राजनीति, समाज-सुधार और साहित्य में भी इसकी उल्लेखनीय भूमिका रही।

मध्यप्रदेश, बिहार, उत्तरप्रदेश, बंगाल से लेकर संपूर्ण भारतवर्ष में इस समाज के लोग विभिन्न उपनामों और शाखाओं में फैले हुए हैं।

सनातन धर्म के विभिन्न ग्रंथों और ऐतिहासिक अभिलेखों में भी कलवार/कलाल समाज का उल्लेख मिलता है।

डॉ. हीरालाल का जन्म इसी समाज में हुआ, और उन्होंने अपने परिश्रम व प्रतिभा से यह सिद्ध किया कि समाज का उत्थान व्यक्ति की कर्मनिष्ठा और विद्वता से होता है।

🏰 कलचुरी वंश का गौरव

कलचुरी वंश मध्य भारत का गौरव रहा है।

इस वंश के राजाओं ने छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और महाराष्ट्र तक अपने शासन और संस्कृति का विस्तार किया।

त्रिपुरी (जबलपुर) और रतनपुर (छत्तीसगढ़) इस वंश की प्रमुख राजधानियाँ थीं।

कला, स्थापत्य, जलसिंचन, मंदिर-निर्माण और साहित्य के संरक्षण में कलचुरी शासकों का योगदान अद्वितीय रहा।

खजुराहो और रतनपुर के आसपास के मंदिरों तथा अभिलेखों में कलचुरी शासन की गाथाएँ आज भी अंकित हैं।

डॉ. हीरालाल ने अपने शोध और पुरातात्त्विक कार्यों से कलचुरी वंश की ऐतिहासिक परंपरा को पुनर्जीवित किया और उसके गौरव को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित किया।

📚 प्रशासनिक यात्रा

उन्होंने अपने जीवन में विविध प्रशासनिक पदों पर कार्य किया—
अध्यापक

विज्ञान प्रशिक्षक

कृषि प्रशिक्षक

स्कूल निरीक्षक

अकाल राहत अधिकारी

अतिरिक्त सहायक आयुक्त

रायपुर, नागपुर, जबलपुर, सागर, बालाघाट और छत्तीसगढ़ जैसे अंचलों में उनकी ईमानदार और निष्पक्ष सेवाएँ जनप्रिय बनीं।

✒️ हिंदी गज़ेटियर और रायबहादुर की उपाधि

1910 में उन्होंने हिंदी भाषा में जिलावार गज़ेटियर्स तैयार किए। यह क्रांतिकारी कार्य इतना प्रभावशाली था कि अन्य प्रांतों ने भी इसका अनुसरण किया।
👉 इसी योगदान के लिए उन्हें “रायबहादुर” की उपाधि से विभूषित किया गया।

🏛️ पुरातत्त्व, इतिहास और लेखन

1914 : Inscriptions in the Central Provinces and Berar

1916 : Descriptive Lists of Inscriptions in the Central Provinces and Berar

📖 The Tribes and Castes of the Central Provinces of India (Russell के साथ)

👉 यह ग्रंथ आज भी न्यायालयों में प्रमाणिक साक्ष्य के रूप में मान्य है।

🎙️ भाषा और नृवंश सर्वेक्षण

सर जॉर्ज ग्रियर्सन के आग्रह पर उन्होंने आदिवासी बोलियों की ग्रामोफोन रिकॉर्डिंग की और भाषाई सर्वेक्षण प्रस्तुत किया।
यह कार्य भारत की भाषिक विविधता के संरक्षण में अमूल्य योगदान है।

🎓 विश्वविद्यालय और हिंदी साहित्य परिषद

नागपुर विश्वविद्यालय से प्रारंभ से ही जुड़ाव

हिंदी साहित्य परिषद की स्थापना

स्नातक व स्नातकोत्तर स्तर पर हिंदी की मान्यता

1933 में सम्मानार्थ उपाधि : Doctor of Literature (D.Litt.)

🌏 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय भूमिका

1930 : ऑल इंडिया ओरिएंटल कॉन्फ्रेंस (पटना) के सभापति

1933 : लंदन पुरातत्त्व सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व

नागरी प्रचारिणी सभा, काशी के संस्थापक व अध्यक्ष

Indian Antiquary, Epigraphia Indica जैसी पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशन

📜 पांडुलिपि-संरक्षण

सेवानिवृत्ति के बाद कटनी में रहते हुए उन्होंने संस्कृत और प्राकृत पांडुलिपियों की विवरणात्मक सूची तैयार की।
👉 इस प्रयास से लगभग 10,000 पांडुलिपियाँ प्रकाश में आईं।

🌺 अवसान और श्रद्धांजलि

🗓️ 19 अगस्त 1934 को उनका निधन हुआ।

राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त ने लिखा—

> “पर तेरा ‘तत्वज्ञ’ स्वयं ही,
एक रत्न था ‘हीरालाल’॥”

भारत सरकार ने उनके सम्मान में डाक टिकट जारी किया।
डॉ. शंकर दयाल शर्मा (भूतपूर्व राष्ट्रपति) ने कहा—

> “कुछ प्रतिभा सम्पन्न व्यक्ति समय की शिला पर अपने पदचिह्न छोड़ जाते हैं। सजग समाज का कर्तव्य है कि उन पदचिह्नों को मिटने न दें।”

✨ निष्कर्ष

डॉ. हीरालाल केवल एक व्यक्ति नहीं थे, वे एक युग-पुरुष थे।
उन्होंने—

कलवार/कलाल समाज को गौरव प्रदान किया,

कलचुरी वंश की ऐतिहासिक धरोहर को पुनर्जीवित किया,

और भारतभूमि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाया।

 

📖🖋️
✍🏼 संकलन : अशोक चौधरी ‘प्रियदर्शी’

कटिहार, बिहार 9431229143

E-mail: editor.namastebharat@gmail.com

ashoke.bms@gmail.com

स्रोत: विभिन्न पुस्तक, संचार माध्यम.

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