“किसान चाहे तो खुद रद्द कर सकता है तीनों कृषि कानूनों को”
इस देश के जो भी किसान केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के पक्ष में नहीं हैं,* *सरकार उनको रद्द नहीं कर रही है,* *आप खुद कर दे रद्द, यदि आपके पड़ोसी ने कर दिये रद्द,आप भी कर दो रद्द “जाने कैसे” –
1. पहला कानून है कि किसान केवल एपीएमसी पर मंडियों में अपनी फसल को बेचने के लिए मजबूर नहीं होगा, जहाँ चाहे और जिसे चाहे बेच सकेगा. जिन किसानों को यह स्वतंत्रता अच्छी न लगे, वे तय कर सकते हैं कि हम तो एपीएमसी पर ही मंडी में जा कर उसी आढ़ती को अपनी फसल बेचेंगे, जिसे पहले बेचते रहे हैं. हो गया पहला कानून रद्द!
2. दूसरा कानून है कि किसान फसल रोपते समय ही पहले से किसी खरीदार से समझौता कर सकेंगे कि उनकी फसल वह खरीदार किस भाव पर खरीदेगा. खरीदार जाये ठेंगे पे! न करें समझौता! हो गया दूसरा कानून रद्द!
3. तीसरा कानून है कि कोई जितनी चाहे उतनी कृषि उपज इकट्ठा रख सकता है, कोई सीमा नहीं रहेगी. वैसे तो किसी किसान के लिए यह बात लागू ही नहीं है, व्यापारियों के लिए है. पर जो किसान इस कानून को गलत पा रहा हो, वह अपने खलिहान में फसल रखने की सीमा खुद तय कर ले! हो गया तीसरा कानून रद्द!
बाकी जिनको ये कानून सही लगते हैं, उन्हें उनके हिसाब से जीने दो!
आपको अगर कानून पसंद नहीं है तो आप उसको नहीं माने कोई जोर जबरदस्ती नहीं है आप पुराने तरीके से ही अपनी फसल को बेचे, पर जिन किसानों को इनका लाभ लेना है कृपया उनको इन कानूनों का लाभ लेने दे. “है न कानून रद्द करने का सबसे सरल उपाय”