जायसवाल समाज उद्भव एवं विकास यात्रा वृतांत: अशोक चौधरी “प्रियदर्शी”

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जायसवाल (कलवार) जाति का उद्भव एवं विकास यात्रा का एक नजर में:

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जायसवाल (कलवार) जाति का इतिहास: चंद्रवंशी क्षत्रिय

कलवार जाति का सम्बन्ध हैहय वंश से जुड़ा है। हैहय वंश के राजा कार्तवीर्य अर्जुन और सहस्त्रबाहू जैसे वीर योद्धा हुए। सहस्त्रबाहू के विषय में एक कथा यह भी प्रचलित है कि इन्हीं के पूर्वज से राजा यदु से यदुवंश प्रचलित हुआ, जिसमें आगे चलकर भगवान श्री कृष्ण और बलराम ने जन्म लिया था।

हरिवंश पुराण के अनुसार, महर्षि वैशम्पायन ने राजा भारत को उनके पूर्वजों का वंश वृत्त बताते हुए कहा कि राजा ययाति का एक तेजस्वी पुत्र हुआ “यदु”। यदु के पांच पुत्र हुए – सहस्त्रद, पयोद, क्रोस्टा, नील और आन्जिक। इनमें से पहला पुत्र सहस्त्रद के परम धार्मिक तीन पुत्र हुए – हैहय, हय और वेनुहय।

हैहय वंश के प्रमुख राजा हुए – कार्तवीर्य अर्जुन, सहस्त्रबाहू, जयध्वज, तालजंग आदि। इस वंश में आगे चलकर कलवार जाति का उद्गम हुआ।

कलवार जाति के इतिहास में उल्लेख है कि वे चंद्रवंशी क्षत्रिय हैं। पद्मभूषण डॉ. हजारी प्रसाद द्विवेदी ने अपनी पुस्तक “अशोक का फूल” में लिखा है कि कलवार वैश्य हैहय क्षत्रिय थे, जो सेना के लिए कलेऊ (दोपहर का खाना) की व्यवस्था करते थे।

कलवार शब्द की उत्पत्ति मेदिनी कोष में कल्यापाल शब्द का ही अपभ्रंश है। श्री नारायण चन्द्र साहा की जाति विषयक खोज से यह सिद्ध होता है कि कलवार उत्तम क्षत्रिय थे।

कलवार / जायसवाल जाति के तीन बड़े हिस्से हुए हैं –
• प्रथम पंजाब दिल्ली के खत्री, अरोरे कलवार, यानि की कपूर, खन्ना, मल्होत्रा, मेहरा, सूरी, भाटिया आदि।
दूसरा हैं राजपुताना के मारवाड़ी कलवार याने अगरवाल, वर्णवाल, लोहिया आदि।
तीसरा हैं देशवाली कलवार जैसे अहलूवालिया, वालिया, बाथम, शिवहरे, माहुरी, शौन्द्रिक, साहा, गुप्ता, महाजन, कलाल, कलार, कराल, कर्णवाल, सोमवंशी, सूर्यवंशी जैस्सार, चौकसे, जायसवाल, व्याहुत, चौधरी, प्रसाद, भगत आदि।

कलवार / जायसवाल जाति का इतिहास गौरवपूर्ण है, जिसका हमें सभी वैश्यों को गर्व करना चाहिए। हम सभी वैश्य हैं और सभी ३७५ जातियों में अपने पुत्र, पुत्री का विवाह सम्बन्ध करना चाहिए।

कलवार/जायसवाल जाति में अनेक महापुरुष हुए हैं, जिन्होंने अपने क्षेत्र में अद्वितीय योगदान दिया है। इन महापुरुषों की जीवनी और उपलब्धियों का उल्लेख करना और उनके जन्म दिवस तथा पुण्य तिथि मनाना समाज में जीवंतता और आपसी सम्पर्क को बढ़ावा देने में मदद करेगा।

इन महापुरुषों में से कुछ प्रमुख हैं:

1. बिहार केसरी दीप नारायण सिंह – एक महान स्वतंत्रता सेनानी और राजनेता।
2. डॉ. काशी प्रसाद जायसवाल – एक प्रसिद्ध इतिहास वेत्ता और लेखक।
3. प्रोफेसर गोरख प्रसाद – एक प्रसिद्ध गणितज्ञ और शिक्षाविद्।
4. प्रोफेसर राजाराम शास्त्री – एक प्रमुख राजनेता और वाराणसी के सांसद।
5. के. कामराज – एक कद्दावर नेता और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री।
6. डॉ. राजकुमार – एक प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता और दक्षिण भारत के एक प्रमुख व्यक्तित्व।

7. डॉ मेघनाथ साहा- एक प्रसिद्ध खगोल भौतिक वैज्ञानिक, साहा समीकरण का विकास किया ।

इन महापुरुषों के जन्म दिवस और पुण्य तिथि मनाने से समाज में निम्नलिखित लाभ हो सकते हैं:

1. समाज में जीवंतता और आपसी सम्पर्क बढ़ेगा।
2. महापुरुषों की जीवनी और उपलब्धियों का ज्ञान युवाओं तक पहुंचेगा।
3. समाज में गर्व और आत्मविश्वास की भावना बढ़ेगी।
4. आपसी सहयोग और समर्थन की भावना विकसित होगी।

इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए, कलवार/जायसवाल जाति के लोगों को इन महापुरुषों की जीवनी और उपलब्धियों का अध्ययन करना और उनके जन्म दिवस तथा पुण्य तिथि मनाने का प्रयास करना चाहिए। इससे समाज में एक नई जीवंतता और ऊर्जा का संचार होगा और हम अपने महापुरुषों की विरासत को आगे बढ़ाने में सक्षम होंगे।

!!शब्द संयोजन!!

 

*डॉ अशोक चौधरी “प्रियदर्शी”*✍️
अमला टोला, कटिहार, बिहार 854105
संपर्क: 9431229143

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