मोमता ने हिंदुओं पर वैसे ही अत्याचार किए जैसे बंगाल के नवाब ने चैतन्य महाप्रभु पर किए थे.

मोमता ने हिंदुओं पर वैसे ही अत्याचार किए जैसे बंगाल के नवाब ने चैतन्य महाप्रभु पर किए थे.

इतिहास खुद को दोहराता है… बार बार दोहराता है क्योंकि लोग बदलना नहीं चाहते हैं ना तो इस देश का मुसलमान बदला… मुसलमान आज भी जिहाद के रास्ते पर चल रहा है और ना ही आज का हिंदू बदला जो कि आज भी सेक्युलरिज्म के रास्ते पर चल रहा है… इसीलिए इतिहास खुद को बार बार दोहराता है

चैतन्य महाप्रभु का जन्म 1484 ईस्वी में बंगाल के नदिया जिले में हुआ था… उस समय बंगाल का नवाब हुसैन शाह था. हुसैन शाह की मुस्लिम सेनाएँ बहुत तेजी से हिंदुओं का दमन कर रही थीं… हिंदू बहिन बेटियों की इज्जत आबरू का कोई मोल नहीं रह गया था. गौमांस खिलाकर हिन्दुओं को लगातार मुसलमान बनाया जा रहा था.
ऐसे समय में चैतन्य महाप्रभु का जन्म हुआ था और उन्होंने हिंदू धर्म के बीच प्रचार के लिए हरिनाम संकीर्तन पर जोर दिया… उनका एक मंत्र आज भी महामंत्र है जिसे निमाई कहा जाता है… ये मंत्र है… हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे, हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे !!

पूरे बंगाल में चैतन्य महाप्रभु की वाणी गूंजने लगी… लोग भक्तिभाव में झूमने लगे… बंगाल के नवाब की नाक के नीचे जगह जगह कृष्ण और राम के संकीर्तन शुरू हो गए… नवाब इससे क्रोधित हो उठा… फिर क्या था क़ाज़ियों ने हरिनाम कहने वालों पर अत्याचार शुरू कर दिये

चैतन्य महाप्रभु पर गौमांस के टुकड़े फेंके गए… कितने ही हिंदुओं को कठोर दंड और यातनाएँ देनी शुरू की गई… पूरे नदिया जिले में हिंदू स्त्रियों का सतीत्व भंग किया गया । महिलाओं और पुरुषों के होठों पर जरदस्ती गौमांस के टुकड़े छुआए गए… बच्चों तक को काट डाला गया और ये सब इसलिए क्योंकि हिंदू अपनी ही धरती पर राम कृष्ण नाम का संकीर्तन कर रहे थे.

 

इस वक्त बंगाल में मोमता का राज चल रहा है और मोमता ने भी ठीक इसी तरह हिंदुओं की दुर्गापूजा वगैरह पर तरह तरह की बंदिशें लगाने की कोशिश की हैं जिसके बाद हाईकोर्ट तक को दख़लंदाज़ी करनी पड़ी है.

ऐसी स्थिति में ये बात बिलकुल साफ है… कि अगर बंगाल का हिंदू नहीं जागा तो स्थितियाँ बहुत ही ज्यादा विकट हो जाएँगी… इस वक्त भी मुस्लिमों के समर्थन से मोमता की सरकार चल रही है और आगे फिर ऐसा ही हुआ तो बंगाल में हिंदुओं को बहुत ज़्यादा कष्ट झेलने पड़ेंगे .

इतिहास खुद को दोहराता है… बार बार दोहराता है क्योंकि लोग बदलना नहीं चाहते हैं ना तो इस देश का मुसलमान बदला… मुसलमान आज भी जिहाद के रास्ते पर चल रहा है और ना ही आज का हिंदू बदला जो कि आज भी सेक्युलरिज्म के रास्ते पर चल रहा है… इसीलिए इतिहास खुद को बार बार दोहराता है

चैतन्य महाप्रभु का जन्म 1484 ईस्वी में बंगाल के नदिया जिले में हुआ था… उस समय बंगाल का नवाब हुसैन शाह था. हुसैन शाह की मुस्लिम सेनाएँ बहुत तेजी से हिंदुओं का दमन कर रही थीं… हिंदू बहिन बेटियों की इज्जत आबरू का कोई मोल नहीं रह गया था. गौमांस खिलाकर ब्राह्मणों को लगातार मुसलमान बनाया जा रहा था.
ऐसे समय में चैतन्य महाप्रभु का जन्म हुआ था और उन्होंने हिंदू धर्म के बीच प्रचार के लिए हरिनाम संकीर्तन पर जोर दिया… उनका एक मंत्र आज भी महामंत्र है जिसे निमाई कहा जाता है… ये मंत्र है… हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे, हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे !!

पूरे बंगाल में चैतन्य महाप्रभु की वाणी गूंजने लगी… लोग भक्तिभाव में झूमने लगे… बंगाल के नवाब की नाक के नीचे जगह जगह कृष्ण और राम के संकीर्तन शुरू हो गए… नवाब इससे क्रोधित हो उठा… फिर क्या था क़ाज़ियों ने हरिनाम कहने वालों पर अत्याचार शुरू कर दिये

चैतन्य महाप्रभु पर गौमांस के टुकड़े फेंके गए… कितने ही हिंदुओं को कठोर दंड और यातनाएँ देनी शुरू की गई… पूरे नदिया जिले में हिंदू स्त्रियों का सतीत्व भंग किया गया । महिलाओं और पुरुषों के होठों पर जरदस्ती गौमांस के टुकड़े छुआए गए… बच्चों तक को काट डाला गया और ये सब इसलिए क्योंकि हिंदू अपनी ही धरती पर राम कृष्ण नाम का संकीर्तन कर रहे थे.

 

इस वक्त बंगाल में मोमता का राज चल रहा है और मोमता ने भी ठीक इसी तरह हिंदुओं की दुर्गापूजा वगैरह पर तरह तरह की बंदिशें लगाने की कोशिश की हैं जिसके बाद हाईकोर्ट तक को दख़लंदाज़ी करनी पड़ी है.

ऐसी स्थिति में ये बात बिलकुल साफ है… कि अगर बंगाल का हिंदू नहीं जागा तो स्थितियाँ बहुत ही ज्यादा विकट हो जाएँगी… इस वक्त भी मुस्लिमों के समर्थन से मोमता की सरकार चल रही है और आगे फिर ऐसा ही हुआ तो बंगाल में हिंदुओं को बहुत ज़्यादा कष्ट झेलने पड़ेंगे .

2 thoughts on “मोमता का हिन्दुओं पर अत्याचार, ‘”नवाब हुसैन शाह'” की याद ताजा कर रहा है.”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *