जिंदगी की इस आपाधापी में
Spread the loveजिंदगी की इस आपाधापी में,कब जिंदगी की सुबह से शाम हो गई,पता ही नहीं चला। कल तक जिन मैदानों में खेला करते थे,आज वो मैदान नीलाम हो गए,पता ही नहीं चला। रूह आज भी बचपन में अटकी,बस शरीर जवान हो गया। गांव से चला था,कब शहर आ गया पता ही नहीं चला। पैदल…









