इतिहास के पन्नों से ……..
1972 में म्यूनिख ओलंपिक में 11 इजराइलियों की हत्या का बदला 210 हत्याओं से लिया गया.

उस वक्त इजराइल की प्रधानमंत्री गोल्डा मायर थी

गोल्डा मायर के साथ जो कैबिनेट बैठी. कैबिनेट को कोर्ट की तरह माना गया. और उस कोर्ट ने आतंकवादियों को सीधे दोषी माना.

इसके बाद पहली बार इतिहास में इजराइल की सरकार ने पर्सनल किलिंग यानी टारेगेट किलिंग का फैसला लिया.

सबसे पहले फिलिस्तीनियों को दर्द देने के लिए इजराइल ने सीरिया और लेबनान में बमबारी करके 200 फिलिस्तानी शरणार्थियों का कत्ल कर दिया.

इसके बाद यूरोप में अलग-अलग जगहों पर फिलिस्तीन के 10 लोगों को मारा गया.

इसके बाद भी गोल्डा मायर ने बदले की आग ठंडी नहीं होने दी. म्यूनिख आतंकी हमले में शामिल सभी 10 आतंकियों को चुन चुन कर खत्म किया गया.

म्यूनिख हमले के मास्टर माइंड और यासिर अराफात के करीबी रेड प्रिंस को भी आखिर में मोसाद ने मार गिराया.

यही नहीं सरकार की तरफ से म्यूनिख आतंकवादी हमले में मारे गए इजराइली लोगों के परिवारों को फोन भी किया गया कि आप आज रात 10 बजे का समाचार सुनिए ताकी पीड़ित परिवारों को ये जानकारी मिल जाए कि बदला पूरा लिया गया है.

म्युनिख के आतंकियों की टारगेट किलिंग के बाद पूरी दुनिया में इजराइल की एक बहुत सख्त छवि बन गई और वो ये थी कि इजराइल कभी अपने दुश्मन को छोड़ता नहीं है.

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