Author: अशोक चौधरी "प्रियदर्शी"

seagull, gull, bird

संस्मरण: रवि घोष जी

बाल की खाल दिनांक 14/11/1986 को बाल दिवस के दिन मैने आबादपुर शाखा मे शाखा प्रबंधक के पद पर अपना योगदान दिया।श्री ओम प्रकाश सिन्हा जी से मैने प्रभार लिया था।एक दिन एक ग्रामीण आये तो बडी आत्मीयता से मिले और बातचीत के दौरान मुझे आश्वस्त किया कि आपको यहां कोई परेशानी नही होगी क्योंकि…

आध्यात्मिक चिंतन

जिस शरीर के लिएतुम सारी दौड़-धूप कर रहे हो, जिस धन के लिए सारा जीवन अपना समाप्त कर रहे हो, अमूल्य समय को नष्ट कर रहे हो, अवसर को खो रहे हो, जब मौत द्वार पर आ जायेगी तो तुम्हारा लाभ, लाभ सिद्ध न होगा; तुम्हारा धन, धन सिद्ध न होगा। तब कितना बैंक में…

heart, cross, love

ज्योतिष: जीवन में रंगों का प्रभाव

  रंगों का हमारे जीवन में बहुत महत्व है। वैज्ञानिकों के अनुसार रंग तो मूलत: पांच ही होते हैं- कला, सफेद, लाल, नीला और पीला। काले और सफेद को रंग मानना हमारी मजबूरी है जबकि यह कोई रंग नहीं है। इस तरह तीन ही प्रमुख रंग बच जाते हैं- लाल, पीला और नीला। आपने आग…

seagull, bird, water bird

मन की बात

जरा उडक़र तो देखो मकड़ी भी नहीं फँसती,अपने बनाये जालों में। जितना आदमी उलझा है,अपने बुने ख़यालों में…।। तुम निचे गिरके देखो…कोई नहीं आएगा उठाने…!!! तुम जरा उडक़र तो देखो…सब आयेंगे गिराने……!!!   अशोक कुमार चौधरी “प्रियदर्शी”  

जयंती: शहीद-ए-आजम भगत सिंह

भगत सिंह का जन्म 27/28 सितंबर 1907 को लायलपुर जिले के बंगा में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है। उस समय उनके चाचा अजीत सिंह और श्‍वान सिंह भारत की आजादी में अपना सहयोग दे रहे थे। ये दोनों करतार सिंह सराभा द्वारा संचालित गदर पाटी के सदस्‍य थे। भगत सिंह पर इन दोनों…

blackbird, bird, animal

मन की बात

हर एक लिखी हुई बात कोहर एक पढ़ने वाला नहीं समझ सकता “क्योंकि” लिखने वाला“भावनाएं” लिखता हैऔरलोग केवल “शब्द” पढ़ते हैं. अशोक कुमार चौधरी “प्रियदर्शी”

जानिए क्या है कृषि संशोधन बिल

विपक्ष क्यो जला रही सरकारी संपत्ति,करे कोर्ट में अपील हो अगर कोई आपत्ति,किसान का फायदा देखने की नही है चाहत, तो मिट जाएगी विपक्ष की संतति_* केंद्र सरकार (Central Government) द्वारा लाए गए कृषि बिल (Farm Bill) के खिलाफ किसानों का प्रायोजित विरोध प्रदर्शन जारी है. कृषि बिल के खिलाफ पंजाब में किसान समिति ने…

तू जिंदगी को जी, समझने की कोशिश न कर: प्रियदर्शी

तू जिंदगी को जी,उसे समझने की कोशिश न कर सुन्दर सपनो के ताने बाने बुन,उसमे उलझने की कोशिश न कर चलते वक़्त के साथ तू भी चल,उसमे सिमटने की कोशिश न कर अपने हाथो को फैला, खुल कर साँस ले,अंदर ही अंदर घुटने की कोशिश न कर मन में चल रहे युद्ध को विराम दे,खामख्वाह…