Author: अशोक चौधरी "प्रियदर्शी"

केवल ऊँचाई ही काफ़ी नहीं होती

ज़िन्दगी पर अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रसिद्ध कविता सच्चाई यह है किकेवल ऊँचाई ही काफ़ी नहीं होती,सबसे अलग-थलग,परिवेश से पृथक,अपनों से कटा-बँटा,शून्य में अकेला खड़ा होना,पहाड़ की महानता नहीं,मजबूरी है।ऊँचाई और गहराई मेंआकाश-पाताल की दूरी है। जो जितना ऊँचा,उतना एकाकी होता है,हर भार को स्वयं ढोता है,चेहरे पर मुस्कानें चिपका,मन ही मन रोता है।…

आईए जानते हैं ग्रह रत्न के बारे में

क्या रत्नों में इतनी शक्ति होती है कि मनुष्य की जिंदगी बदल दे ? ज्योतिष गुरु अशोक “प्रियदर्शी” आईए जानते हैं ग्रह रत्न के बारे में प्राचीनकाल में प्राप्त रत्नों का उल्लेख : प्राचीनकाल से ही रत्न अपने आकर्षक रंगों, प्रभाव, आभा तथा बहुमूल्यता के कारण मानव को प्रभावित करते आ रहे हैं। अग्नि पुराण,…

जयंती: पंडित दीनदयाल उपाध्याय

25 सितंबर : पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती जन्म- 25 सितंबर 1916 मृत्यु- 11 फरवरी 1968 पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितंबर 1916 को मथुरा जिले के नगला चंद्रभान गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम भगवती प्रसाद उपाध्याय और माता का नाम रामप्यारी था। उनके पिता रेलवे में सहायक स्टेशन मास्टर थे…

अर्धांगिनी की विदाई

अर्धांगिनी की विदाई एक गांव में चौधरी और उसकी पत्नी रात को बाते करते करते सो जाते है,,सोने के बाद चौधरी की पत्नी अचानक रात को गुजर जाती है !घर में रोने की आवाज आ रही है। पत्नी का अंतिम दर्शन चल रहा था।उस वक्त पत्नी की आत्मा जाते जाते जो कह रही है उसका…

जाने वज्रासन योग की सम्पूर्ण जानकारी

योग से रहे निरोग: वज्रासन : जाने वज्रासन योग की सम्पूर्ण जानकारी लाभ और सावधानियां समस्त योगआसनों (Yogasana) में वज्रासन ही एक ऐसा आसन है, जिसे भोजन या नाश्ता करने के उपरांत तुरंत भी किया जा सकता है। स्वास्थ्य के लिए वज्रासन अभ्यास अति लाभदायक होता है। वज्रासन हर उम्र का व्यक्ति सरलता से कर…

यदि आपके पास वाहन के दस्तावेज नहीं हैं

गाड़ी के कागजात पूरे नही होने से कटा चालान अब मात्र 100रुपए में किया जा सकता है रद्द, जानिए क्या है ये नियम 100 रुपए में रद्द हो सकता है चालान हमारी आपसे प्रार्थना है क़ी अपने स्कूटर, बाइक, कार और दूसरी गाड़ियों के कागजात (डॉक्यूमेंट्स) पूरे रखें. कागज पूरे होने पर आपका चालान नहीं…

संस्मरण: रमेश उपाध्याय जी पार्ट 2

कोशी क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक:भोगा यथार्थ 1 A गतांक में आगे——-              कुमारखंड की चर्चा के कुछ महत्वपूर्ण सन्दर्भ   छूट गए थे ।उस समय के  cash remittance की व्यवस्था जानें ।राशि  की जरूरत पडने पर सेन्ट्रल बैंक मुरलीगंज से प्रधान कार्यालय खाता से मात्र पाँच हजार नगदी प्राप्त होती थी ।कभी-कभी…

एक शब्द कई अर्थ

एक पुरानी कथा जो आज भी बिल्कुल प्रसांगिक है एक राजा को राज करते काफी समय हो गया था। बाल भी सफ़ेद होने लगे थे। एक दिन उसने अपने दरबार में उत्सव रखा और अपने मित्र देश के राजाओं को भी सादर आमन्त्रित किया व अपने गुरुदेव को भी बुलाया। उत्सव को रोचक बनाने के…

नयका पाहून

तब ससुराल में नयका पाहून पहले के जमाने में दामाद की पूंछ परख और स्वागत का तरीका भी अलग ही ढंग का होता था।जब कभी, पूर्व सूचना पर आगमन होता तो क्या कहने।एक दो आदमी स्टेशन आते, एक सूटकेस थामता, पहले से तय किये रिक्शे में दामाद को बीचो बीच सैट कर, यात्रा का हालचाल…