केवल ऊँचाई ही काफ़ी नहीं होती
ज़िन्दगी पर अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रसिद्ध कविता सच्चाई यह है किकेवल ऊँचाई ही काफ़ी नहीं होती,सबसे अलग-थलग,परिवेश से पृथक,अपनों से कटा-बँटा,शून्य में अकेला खड़ा होना,पहाड़ की महानता नहीं,मजबूरी है।ऊँचाई और गहराई मेंआकाश-पाताल की दूरी है। जो जितना ऊँचा,उतना एकाकी होता है,हर भार को स्वयं ढोता है,चेहरे पर मुस्कानें चिपका,मन ही मन रोता है।…








