संस्मरण: रमेश उपाध्याय जी भाग ३
Spread the loveरमेश उपाध्याय, बनारस कोशी क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक:भोगा यथार्थ – 2 ।।निवेदन–: जैसा कि शीर्षक से ही स्पष्ट है ,मैं बैक मे अपने यादगार विगत क्षणों का पुनरावलोकन करने काप्रयास कर रहा हूँ ।तथ्यों को संयमित कर बिना किसी को आहत किये मैं सहरसा मे बिताये सात वर्षों को एक बार फिर जीने का…









